Paytm के बड़े दांव! सब्सिडियरी में हिस्सेदारी बढ़कर **82.6%** हुई, ₹90 Cr लोन की गारंटी मंजूर

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AuthorNeha Patil|Published at:
Paytm के बड़े दांव! सब्सिडियरी में हिस्सेदारी बढ़कर **82.6%** हुई, ₹90 Cr लोन की गारंटी मंजूर
Overview

One 97 Communications (Paytm) ने अपनी सब्सिडियरी First Games Technology Private Limited (FGTPL) में अपनी हिस्सेदारी को **82.6%** तक बढ़ाने का फैसला किया है। कंपनी ने **₹197 करोड़** के लोन को इक्विटी में बदला है। साथ ही, Piramal Finance के जरिए दिए जाने वाले **₹90 करोड़** के लोन के लिए गारंटी (DLG) को भी मंजूरी दे दी है।

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बोर्ड की अहम मंजूरी: FGTPL में Paytm की हिस्सेदारी 82.6% तक पहुंची

Paytm की पैरेंट कंपनी One 97 Communications के बोर्ड ने अपनी सब्सिडियरी First Games Technology Private Limited (FGTPL) को लेकर बड़े फैसले लिए हैं। कंपनी ने लगभग ₹197 करोड़ के मौजूदा लोन को FGTPL की इक्विटी में बदलने की मंजूरी दी है। इस कदम से FGTPL में Paytm की हिस्सेदारी, जो अभी 55% है, बढ़कर 82.6% (fully diluted basis पर) हो जाएगी। यह डील 30 अप्रैल, 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है। इसके अलावा, Paytm ने Piramal Finance के साथ मिलकर ₹90 करोड़ की Default Loss Guarantee (DLG) पर भी सहमति जताई है। यह गारंटी Piramal Finance द्वारा Paytm प्लेटफॉर्म के जरिए बांटे जाने वाले लोन में संभावित नुकसान को कवर करेगी।

रणनीतिक चाल: लेंडिंग बिजनेस को मजबूती

यह कदम FGTPL के प्रति Paytm की बढ़ती प्रतिबद्धता और इसके लोन डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस को बढ़ाने की रणनीति को दर्शाता है। FGTPL में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने से Paytm का नियंत्रण बढ़ेगा और भविष्य में बेहतर रिटर्न की उम्मीद है। DLG की मंजूरी यह भी दिखाती है कि Paytm क्रेडिट की सुविधा देने में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है, और वह लोन की मात्रा बढ़ाने तथा पार्टनरशिप मजबूत करने के लिए कुछ डिफॉल्ट जोखिम उठाने को तैयार है। यह Paytm के पेमेंट बिजनेस से आगे बढ़कर फाइनेंशियल सर्विसेज और रेवेन्यू बढ़ाने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है, खासकर तब जब डिजिटल लेंडिंग नियमों में बदलाव हो रहे हैं।

FGTPL का बिजनेस में बदलाव

पहले FGTPL भारत के ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग (RMG) सेक्टर में काम करती थी। हालांकि, नए नियमों, जिसमें 2025 का ऑनलाइन गेमिंग एक्ट भी शामिल है, के बाद ऑनलाइन मनी गेमिंग पर बैन लगने से इस बिजनेस को बंद करना पड़ा। अब Paytm FGTPL को अपने लेंडिंग डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस को सपोर्ट करने के लिए इस्तेमाल करने पर फोकस कर रही है। यह NBFCs और बैंकों के साथ पार्टनरशिप में First Loss Default Guarantee (FLDG) जैसे मॉडल का उपयोग करती है। इस स्ट्रेटेजी से Paytm क्रेडिट जोखिम का एक हिस्सा कवर करती है, जिससे लेंडर्स को प्लेटफॉर्म के जरिए ज्यादा लोन बांटने के लिए बढ़ावा मिलता है और डिस्ट्रीब्यूशन फीस से रेवेन्यू बढ़ता है।

Paytm पर असर और संभावित जोखिम

Paytm की FGTPL में हिस्सेदारी 55% से बढ़कर 82.6% हो जाएगी। DLG के तहत, कंपनी Piramal Finance के लोन में ₹90 करोड़ तक के वित्तीय जोखिम का सामना करेगी। FGTPL का फोकस अब पूर्व गेमिंग ऑपरेशंस से हटकर Paytm के फाइनेंशियल सर्विसेज या अन्य रणनीतिक लक्ष्यों का समर्थन करने पर होगा। हालांकि, FGTPL का मुख्य बिजनेस (ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग) रेगुलेटरी बैन के कारण बंद हो चुका है, जो इसके भविष्य की दिशा या वैल्यू में बदलाव का संकेत दे सकता है। साथ ही, Paytm को SEBI की ओर से संबंधित-पक्ष लेनदेन पर चेतावनी और अधिकारियों से जुड़े सिक्योरिटीज कानून उल्लंघन के मामलों में सेटलमेंट जैसी नियामक जांचों का भी सामना करना पड़ा है, जो अनुपालन संबंधी मुद्दों को उजागर कर सकते हैं।

इंडस्ट्री और आगे की राह

Paytm डिजिटल पेमेंट और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में PhonePe और Mobikwik जैसे दिग्गजों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है। PhonePe भी लोन डिस्ट्रीब्यूशन की ओर बढ़ रहा है और IPO की तैयारी में है, जिसने रेगुलेटरी एक्शन्स के कारण रियल मनी गेमिंग जैसे रेवेन्यू स्ट्रीम्स से बाहर निकलना पड़ा है। भारत में ऑनलाइन मनी गेमिंग पर बैन का गेमिंग सेक्टर पर गहरा असर पड़ा है, जिससे Dream11 और Flutter's Junglee Games जैसे बड़े ब्रांडों को भी पीछे हटना पड़ा है। निवेशक 30 अप्रैल, 2026 तक FGTPL लोन कन्वर्जन के पूरा होने पर नजर रखेंगे। साथ ही, Paytm के लोन डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस पर ₹90 करोड़ की DLG का वित्तीय प्रभाव और प्रदर्शन का भी मूल्यांकन किया जाएगा। FGTPL के भविष्य के फोकस और भारत के डिजिटल लेंडिंग सेक्टर को प्रभावित करने वाले किसी भी अन्य नियामक बदलाव पर भी ध्यान दिया जाएगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.