ट्रेडिंग विंडो बंद होने का मतलब
यह कदम SEBI के इनसाइडर ट्रेडिंग (Prohibition of Insider Trading - PIT) रेगुलेशन, 2015 के तहत उठाया गया है। इसका सीधा मतलब है कि कंपनी के डायरेक्टर्स, प्रमोटर्स और अन्य 'डेजिग्नेटेड पर्सन' (Designated Persons) इस तय अवधि के दौरान कंपनी के शेयर खरीद या बेच नहीं पाएंगे। यह नियम इसलिए बनाए गए हैं ताकि कोई भी व्यक्ति कंपनी की ऐसी जानकारी का फायदा न उठा सके जो अभी तक पब्लिक डोमेन में नहीं आई है।
SEBI का कड़ा रुख और नए नियम
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने हाल ही में इन नियमों को और सख्त बनाया है। अप्रैल 2025 में जारी एक सर्कुलर के अनुसार, अब इन 'डेजिग्नेटेड पर्सन' के 'इमीडिएट रिलेटिव्स' (Immediate Relatives) यानी करीबी रिश्तेदारों पर भी यह पाबंदी लागू होती है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि इनसाइडर ट्रेडिंग के लिए कोई भी छिपी हुई राह न बची रहे।
Odigma Consultancy का संदर्भ
Odigma Consultancy Solutions Limited, जो Infibeam group का हिस्सा है, भारत में डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स सोल्यूशंस प्रदान करती है। कंपनी के लिए, इस तय समय सीमा के दौरान शेयर की खरीद-बिक्री पर रोक लगाना एक सामान्य प्रक्रिया है। यह कंपनियों के लिए रेग्युलेटरी बेस्ट प्रैक्टिस का हिस्सा है।
निवेशकों के लिए क्या है अहम
निवेशकों को अब कंपनी के 31 मार्च, 2026 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के नतीजों का इंतजार रहेगा। जिस दिन कंपनी अपने नतीजे घोषित करेगी, उसी दिन या उसके तुरंत बाद यह ट्रेडिंग विंडो दोबारा खुल जाएगी। नतीजों के साथ जारी होने वाले किसी भी फॉरवर्ड-लुकिंग स्टेटमेंट (Forward-Looking Statement) पर निवेशकों को खास नजर रखनी चाहिए।
