स्किल्स की दुनिया में क्या है खास?
NIIT और YouGov की यह रिपोर्ट बताती है कि भारत में भविष्य के जॉब मार्केट के लिए AI, साइबर सुरक्षा और डिजिटल स्किल्स का दबदबा रहने वाला है। खास बात यह है कि 6 से 15 साल के अनुभव वाले मिड-कैरियर प्रोफेशनल्स की तलाश ज़्यादा है, लेकिन ऐसे योग्य लोग बाज़ार में कम मिल रहे हैं। इसका मतलब है कि मौजूदा कर्मचारियों को लगातार नई स्किल्स सिखाने (upskilling) की ज़रूरत है ताकि यह डिमांड-सप्लाई गैप भरा जा सके।
डिग्री से ज़्यादा वैल्यू किसे?
रिपोर्ट के अनुसार, आजकल कंपनियों और प्रोफेशनल्स की पहली पसंद ट्रेडिशनल डिग्रियों के बजाय इंडस्ट्री सर्टिफिकेशन्स और माइक्रो-क्रेडेंशियल्स बन गए हैं। 38% लोगों का मानना है कि सर्टिफिकेशन्स ज़्यादा मायने रखते हैं। इसी ट्रेंड को देखते हुए, 69% कंपनियों ने पिछले साल अपने लर्निंग एंड डेवलपमेंट (L&D) बजट को बढ़ाया है। यह कदम डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की ज़रूरत और टैलेंट की कमी के कारण उठाया गया है। इस रिपोर्ट के लिए 3,500 से ज़्यादा लोगों का सर्वे किया गया, जिनमें स्टूडेंट्स, प्रोफेशनल्स और रिक्रूटर्स शामिल थे।
कंपनियों और वर्कर्स के लिए क्या मतलब?
यह रिपोर्ट यह साफ़ करती है कि भविष्य में कंपनियों को टैलेंट लाने और उसे डेवलप करने के तरीके बदलने होंगे। अब एम्प्लॉयबिलिटी (रोजगार क्षमता) सीधे तौर पर एडवांस्ड डिजिटल स्किल्स से जुड़ गई है। इसलिए, कंपनियां अपनी हायरिंग स्ट्रेटेजी बदल रही हैं और अपने मौजूदा कर्मचारियों को नई स्किल्स सिखाने में ज़्यादा निवेश कर रही हैं। वर्कर्स के लिए भी यह ज़रूरी है कि वे इन-डिमांड टेक्निकल स्किल्स और सर्टिफिकेशन्स हासिल करें ताकि वे बदलते जॉब मार्केट में कॉम्पिटिटिव बने रह सकें। यह भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
NIIT का बैकग्राउंड
NIIT की स्थापना 1981 में हुई थी और कंपनी लगातार IT इंडस्ट्री की मैनपावर की ज़रूरतें पूरी करने और स्किल्स गैप को भरने का काम कर रही है। इसने साइबर सुरक्षा और क्लाउड जैसे क्षेत्रों में खास प्रोग्राम चलाए हैं। हाल ही में, NIIT ने SweetRush Inc. को एक्वायर करके अपनी ग्लोबल रीच बढ़ाई है।
भविष्य के हायरिंग और डेवलपमेंट ट्रेंड्स
कंपनियां अब ट्रेडिशनल डिग्रियों पर निर्भर रहने के बजाय वैरिफायबल इंडस्ट्री सर्टिफिकेशन्स और स्पेशलाइज्ड डिजिटल स्किल्स वाले कैंडिडेट्स को ज़्यादा तवज्जो देंगी। L&D प्रोग्राम्स में निवेश बढ़ेगा, खासकर AI, साइबर सुरक्षा और डेटा एनालिटिक्स के लिए। मिड-कैरियर प्रोफेशनल्स को अट्रैक्ट, रिटेन और डेवलप करने के लिए कंपनियों को प्रोएक्टिव स्ट्रेटेजीज़ अपनानी होंगी। साथ ही, वर्कप्लेस में लगातार सीखने (continuous learning) की कल्चर को बढ़ावा देना होगा।
चुनौतियाँ क्या हैं?
नई स्किल्स सीखने में सबसे बड़ी बाधा 41% लोगों के अनुसार, फॉर्मल ट्रेनिंग प्रोग्राम्स का महंगा होना है। इसके अलावा, स्टूडेंट्स जहां 62% हाइब्रिड वर्क मॉडल पसंद करते हैं, वहीं एम्प्लॉयर्स सिर्फ 38% फुल रिमोट रोल दे रहे हैं, जो शुरुआती हायरिंग और रिटेंशन को प्रभावित कर सकता है। अपस्किलिंग को बड़े पैमाने पर लागू करना भी एक चुनौती बनी हुई है।
मुख्य रिपोर्ट आंकड़े
- 69% संगठनों ने बढ़ाया L&D बजट (पिछले साल)
- 38% रेस्पोंडेंट्स के अनुसार, सर्टिफिकेशन्स को डिग्री से ज़्यादा वैल्यू दी जाती है (2026)
- 38% रिक्रूटर्स मानते हैं कि मिड-कैरियर प्रोफेशनल्स सबसे ज़्यादा कंस्ट्रेंड टैलेंट पूल हैं (2026)
- 62% स्टूडेंट्स हाइब्रिड वर्क मॉडल पसंद करते हैं (2026)