IT कंपनी Mphasis Limited ने हाल ही में शेयर बाज़ार को सूचित किया है कि उन्हें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से ₹151.73 करोड़ का एक बड़ा डिमांड नोटिस मिला है। यह नोटिस फाइनेंशियल ईयर 2020-21 (Assessment Year 2020-21) के लिए जारी किया गया है। इस डिमांड का मुख्य कारण विदेशी कंपनियों को किए गए भुगतानों पर TDS (Tax Deducted at Source) में कथित गड़बड़ी है, जिसके साथ संबंधित ब्याज भी जोड़ा गया है।
Mphasis का कहना है कि वे इस मामले पर कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं और विभाग के इस आदेश के खिलाफ अपील फाइल करने की योजना बना रहे हैं। कंपनी प्रबंधन ने विश्वास जताया है कि अपील का नतीजा उनके पक्ष में रहेगा और इस पूरी प्रक्रिया का कंपनी के फाइनेंस पर कोई बड़ा या मटीरियल (material) प्रभाव नहीं पड़ेगा।
यह पहली बार नहीं है जब Mphasis को इस तरह के टैक्स डिमांड का सामना करना पड़ा है। पहले भी, अप्रैल 2025 में कंपनी को FY19-20 के लिए ₹232.37 करोड़ का डिमांड नोटिस मिला था, जो कि विदेशी सब्सिडियरीज़ को TDS भुगतान से जुड़ा था। इसके अलावा, मार्च 2026 में ₹2,286.86 करोड़ की एक और डिमांड सामने आई थी, जिसमें ओवरसीज सबकॉन्ट्रैक्टर पेमेंट्स, ESOP (Employee Stock Option Plan) खर्चों और GST टर्नओवर में विसंगतियां शामिल थीं। ये लगातार मामले IT सेक्टर की इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन्स और टैक्स कंप्लायंस पर चल रहे कंसर्न को दर्शाते हैं।
अगर Mphasis की अपील सफल नहीं होती है, तो कंपनी को न केवल ₹151.73 करोड़ का मूल अमाउंट, बल्कि उस पर लगने वाला अतिरिक्त ब्याज भी चुकाना पड़ सकता है। हालांकि, कंपनी अपनी मंशा के अनुसार इस चुनौती से पार पाने का विश्वास रखती है। Mphasis भारतीय IT सेक्टर की एक प्रमुख कंपनी है, जहाँ TCS, Infosys और Wipro जैसी बड़ी कंपनियाँ भी अक्सर कॉम्प्लेक्स टैक्स नियमों और क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन्स को मैनेज करती हैं।
