Mphasis को मिला GST पेनाल्टी का आदेश
बेंगलुरु के ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ कमर्शियल टैक्सेस (Appeals-5) ने Mphasis Limited को ₹19,41,007 का जुर्माना भरने का आदेश दिया है। यह आदेश 05 मई, 2026 को जारी किया गया है और यह गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक्ट, 2017 के कथित उल्लंघन से जुड़ा है। मुख्य तौर पर, यह मामला इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) के रिवर्सल और स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) एंडोर्समेंट से संबंधित है।
कंपनी ने अपने एक बयान में यह भी साफ किया है कि इस पेनाल्टी ऑर्डर का उसके वित्तीय (Financial), परिचालन (Operational) या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
पेनाल्टी की वजह क्या है?
यह पेनाल्टी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक्ट, 2017 के तहत बताए गए नियमों के कथित उल्लंघन के कारण लगाई गई है। बेंगलुरु के टैक्स अथॉरिटी ने इनपुट टैक्स क्रेडिट के रिवर्सल और एसईजेड (SEZ) एंडोर्समेंट में कुछ विसंगतियां पाई हैं, जिसके चलते यह कार्रवाई हुई है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण?
हालांकि, Mphasis जैसी बड़ी कंपनी के लिए ₹19.4 लाख की राशि बहुत बड़ी नहीं लगती, लेकिन टैक्स अथॉरिटीज से आने वाला कोई भी आदेश ध्यान खींचने वाला होता है। इन्वेस्टर्स इस बात पर गौर करेंगे कि Mphasis का यह कहना कि ऐसे डिमांड्स उसके बिज़नेस पर बड़ा असर नहीं डालते, यह उनका लगातार रुख रहा है। कंपनी पहले भी बड़ी टैक्स डिमांड्स का सामना कर चुकी है और तब भी उसका यही कहना था।
IT सेक्टर में टैक्स विवाद का बड़ा संदर्भ
भारत के IT सेक्टर में टैक्स डिस्प्यूट (Tax Dispute) आम हैं। ये अक्सर टैक्स इंसेंटिव (Tax Incentive) और इंटरनेशनल ट्रांज़ैक्शन्स (International Transactions) से जुड़े नियमों की व्याख्या को लेकर होते हैं। TCS, Infosys और Wipro जैसी बड़ी IT फर्में भी स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) स्कीमों से जुड़े टैक्स लिटिगेशन (Tax Litigation) में शामिल रही हैं।
Mphasis को भी हाल के दिनों में बड़े टैक्स नोटिस मिले हैं। इनमें फाइनेंशियल ईयर 2020-21 और 2023-24 के लिए टैक्स असेसमेंट (Tax Assessment) नोटिस और कर्नाटक टैक्स अथॉरिटीज से ₹32 लाख से ज़्यादा की पिछली पेनाल्टी भी शामिल है। कंपनी इन सभी डिमांड्स को कायम नहीं मानती और उनसे किसी बड़े फाइनेंशियल असर की उम्मीद नहीं करती।
यह पेनाल्टी कंपनियों के लिए GST कंप्लायंस (GST Compliance) में सतर्कता बनाए रखने की याद दिलाती है, खासकर इनपुट टैक्स क्रेडिट मैकेनिज्म (Input Tax Credit Mechanism) और एसईजेड (SEZ) ऑपरेशंस को लेकर। IT सेक्टर टैक्स और GST कंप्लायंस पर जांच के दायरे में बना हुआ है। Mphasis के अपने आत्मविश्वास के बावजूद, भविष्य में इसी तरह की कंप्लायंस-संबंधी नोटिस आने की संभावना बनी हुई है।
