CGST ने बरकरार रखा ₹14.29 करोड़ का टैक्स डिमांड
CGST - Thane के कमिश्नर (अपील्स) ने Meesho Limited के खिलाफ एक बड़ा फैसला सुनाया है। इसके तहत कंपनी पर Tax Collected at Source (TCS) से जुड़ा लगभग ₹14.29 करोड़ का टैक्स डिमांड लागू कर दिया गया है। यह डिमांड 1 अक्टूबर 2018 से 31 मार्च 2020 के बीच रीसेलर ट्रांजैक्शन पर की गई है, जिसमें लागू ब्याज और पेनल्टी भी शामिल हैं। यह आदेश 28 अप्रैल 2026 को जारी किया गया था।
Meesho की क्या है दलील?
Meesho Limited इस टैक्स डिमांड को गलत और अयोग्य मान रही है। कंपनी का कहना है कि वे अपने प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाली सभी सेलर सप्लाई पर सही ढंग से TCS कलेक्ट और डिपॉजिट करते हैं। Meesho ने यह भी साफ किया है कि वे इस फैसले को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (GSTAT) में चुनौती देंगे और उन्हें वहां से राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।
टैक्स का पूरा मामला क्या है?
Meesho एक सोशल कॉमर्स मॉडल पर काम करती है, जहाँ रीसेलर अलग-अलग सप्लायर्स से प्रोडक्ट लेकर आगे बेचते हैं। भारत के Goods and Services Tax (GST) ढांचे के तहत, ई-कॉमर्स ऑपरेटरों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले सेलर्स के टैक्स योग्य सप्लाई पर TCS कलेक्ट करें। यह नियम सेक्टर में टैक्स कंप्लायंस को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया है।
आगे क्या असर हो सकता है?
इतनी बड़ी टैक्स डिमांड और इससे जुड़ी कानूनी लड़ाई से Meesho के लिए वित्तीय अनिश्चितता पैदा हो सकती है। GSTAT में अपील का नतीजा और इस प्रक्रिया में लगने वाला समय व खर्च कंपनी के लिए अहम जोखिम बने रहेंगे।
इंडस्ट्री का नजरिया
Flipkart और Amazon India जैसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेयर्स भी इसी तरह के मार्केटप्लेस मॉडल पर काम करते हैं और इन पर भी GST व TCS से जुड़े नियम लागू होते हैं।
