पूंजी जुटाने की बड़ी योजना
कंपनी ₹10 करोड़ की मौजूदा अधिकृत शेयर पूंजी को बढ़ाकर ₹15 करोड़ करने जा रही है। इस कदम से भविष्य में फंड जुटाने में आसानी होगी। साथ ही, 65,00,000 वॉरंट जारी किए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक को ₹56.84 प्रति वॉरंट के हिसाब से इक्विटी शेयर में बदला जा सकेगा। इस प्रेफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue) का कुल मूल्य ₹36.95 करोड़ है।
प्रमोटर की हिस्सेदारी और ओपन ऑफर
सबसे अहम बात यह है कि कंपनी के प्रमोटर्स अपनी 35,67,969 इक्विटी शेयर, जो कुल हिस्सेदारी का 50.97% है, बेचने की तैयारी में हैं। शेयर परचेज एग्रीमेंट (Share Purchase Agreement) के तहत यह डील हुई है। SEBI के नियमों के अनुसार, इतनी बड़ी हिस्सेदारी की बिक्री से एक ओपन ऑफर (Open Offer) शुरू हो गया है, जो कंपनी के स्वामित्व ढांचे को बदल सकता है।
आगे क्या?
इन सभी प्रस्तावों पर शेयरधारकों की मंजूरी लेने के लिए 14 जून, 2026 को एक एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाई गई है। शेयरधारक की मंजूरी के साथ-साथ रेगुलेटरी बॉडीज से भी अनुमति की आवश्यकता होगी।
क्यों महत्वपूर्ण है ये कदम?
यह रणनीति Lippi Systems को वित्तीय मजबूती देने और वॉरंट इश्यू के जरिए नए रणनीतिक निवेशकों को आकर्षित करने का लक्ष्य रखती है। प्रमोटर्स की हिस्सेदारी की बिक्री नियंत्रण में बदलाव का संकेत दे सकती है, जबकि ओपन ऑफर दूसरे शेयरधारकों को बाहर निकलने का उचित मौका प्रदान करेगा।
जोखिम और आगे की राह
इस पूरे लेन-देन के बाद कंपनी का कैपिटल बेस मजबूत होगा, नए निवेशक जुड़ेंगे और स्वामित्व में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा। हालांकि, वॉरंट कन्वर्जन और ओपन ऑफर में भागीदारी के स्तर पर मौजूदा माइनॉरिटी शेयरधारकों के लिए डाइल्यूशन (Dilution) का जोखिम भी है। सभी मंजूरियां मिलना इस पूरी प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण होगा।
प्रतिस्पर्धी परिदृश्य
Lippi Systems भारतीय आईटी सर्विसेज सेक्टर में Kellton Tech Solutions, Expleo Solutions और Mastek Ltd जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है। ये सभी कंपनियां कस्टमाइज्ड सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और डिजिटल सॉल्यूशंस जैसी सेवाएं देती हैं।