IndiaMART InterMESH Ltd. ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के अपने ऑडिटेड वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं।
कंपनी ने FY26 के लिए ₹1,773.10 करोड़ (या ₹17,731 मिलियन) का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया। वहीं, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹474.70 करोड़ (या ₹4,747 मिलियन) रहा। स्टैंडअलोन (Standalone) आधार पर, नेट प्रॉफिट ₹525.20 करोड़ (या ₹5,252 मिलियन) बताया गया है।
इसके अलावा, कंपनी के बोर्ड ने ₹60 प्रति शेयर के कुल डिविडेंड की सिफारिश की है। इसमें ₹30 का फाइनल डिविडेंड और ₹30 का स्पेशल डिविडेंड शामिल है।
कंपनी ने यह भी बताया कि एम्प्लॉई बेनिफिट्स (Employee Benefits) के प्रोविजन (Provision) में ₹90.72 मिलियन (कंसोलिडेटेड) का इजाफा हुआ है। यह बढ़ोतरी भारत सरकार द्वारा लाए गए नए लेबर कोड्स (Labour Codes) के कारण हुई है।
यह मजबूत वित्तीय प्रदर्शन IndiaMART के लिए महत्वपूर्ण है, जो भारत का सबसे बड़ा B2B मार्केटप्लेस है। प्रस्तावित डिविडेंड भुगतान शेयरधारकों को सीधे लाभ देता है, जो कंपनी की भविष्य की कमाई पर विश्वास को दर्शाता है। एम्प्लॉई बेनिफिट प्रोविजन में किया गया यह एडजस्टमेंट (Adjustment) सरकारी नियमों में हो रहे बदलावों के प्रति कंपनी की प्रतिक्रिया को दिखाता है।
1996 में स्थापित IndiaMART, भारत के B2B ई-कॉमर्स सेक्टर में एक प्रमुख खिलाड़ी है, जिसका मार्केट शेयर लगभग 60% है। जुलाई 2019 में पब्लिक लिस्टिंग के बाद से, कंपनी ऑर्गेनिक ग्रोथ और रणनीतिक अधिग्रहण (Strategic Acquisitions) पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
हालांकि, IndiaMART को कुछ कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। इसमें PUMA SE और Syngenta Group जैसी कंपनियों द्वारा दायर किए गए ट्रेडमार्क उल्लंघन (Trademark Infringement) के मुकदमे शामिल हैं। कंपनी ने OpenAI के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की है, जो AI सर्च रिजल्ट्स से भेदभावपूर्ण बहिष्कार का आरोप लगाती है। इसके अतिरिक्त, सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) द्वारा कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के संबंध में जारी एक शो कॉज नोटिस (Show Cause Notice) भी विचाराधीन है।
B2B मार्केटप्लेस सेक्टर में, IndiaMART का मुकाबला TradeIndia, Alibaba India और Udaan जैसे प्लेटफॉर्म्स से है। IndiaMART ऑनलाइन B2B क्लासिफाइड्स में अग्रणी स्थान रखती है।
निवेशकों की नजरें वार्षिक आम बैठक (AGM) में ₹60 के प्रस्तावित डिविडेंड की शेयरहोल्डर मंजूरी और उसके बाद के भुगतान की तारीख पर रहेंगी। साथ ही, कंपनी द्वारा बढ़ते एम्प्लॉई बेनिफिट कॉस्ट (Employee Benefit Costs) को प्रबंधित करने की रणनीति और चल रहे कानूनी मामलों के अपडेट पर भी ध्यान दिया जाएगा।
