ग्लोबल सब्सिडियरीज़ बनीं ग्रोथ की वजह
FY26 का यह बेहतरीन नतीजा कंपनी की ग्लोबल सब्सिडियरीज़ के दमदार प्रदर्शन का नतीजा है। पूरे साल के लिए कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 8.12% बढ़कर ₹1,107.96 करोड़ रहा। वहीं, चौथी तिमाही (Q4 FY26) में भी कंपनी ने 11.91% की बढ़ोतरी के साथ ₹286.28 करोड़ का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया।
डोमेस्टिक बिजनेस में दिखी नरमी
हालांकि, कंपनी का डोमेस्टिक (घरेलू) स्टैंडअलोन बिजनेस एक अलग कहानी बयां कर रहा है। पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए डोमेस्टिक स्टैंडअलोन रेवेन्यू 8.37% घटकर ₹939.06 करोड़ पर आ गया, जिससे कुल स्टैंडअलोन इनकम 6.41% गिरी। इस पर नए लेबर कोड्स के प्रभाव के कारण ₹14.73 करोड़ का एक असाधारण खर्च (exceptional expense) भी भारी पड़ा।
भविष्य की तैयारी
कंपनी ने एक रणनीतिक कदम उठाते हुए गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (IFSC) में स्थित अपनी सब्सिडियरी में ₹2.10 करोड़ का निवेश किया है। यह कदम स्पेशलाइज्ड फाइनेंशियल सर्विसेज और संभावित अंतरराष्ट्रीय बाजार विस्तार पर फोकस को दर्शाता है।
नतीजों का विश्लेषण
ये नतीजे Expleo के कंसॉलिडेटेड ग्रोथ और उसके स्टैंडअलोन डोमेस्टिक बिजनेस के बीच एक बड़ा अंतर दिखाते हैं। FY26 के लिए कंसॉलिडेटेड अर्निंग्स पर शेयर (EPS) बढ़कर ₹79.89 हो गया, जो पिछले साल ₹66.52 था।
जोखिम और आगे क्या?
मुख्य जोखिमों में डोमेस्टिक रेवेन्यू में लगातार गिरावट और असाधारण खर्चों का असर शामिल है। Expleo IT सर्विसेज और कंसल्टिंग सेक्टर में Tata Elxsi, Persistent Systems और Happiest Minds Technologies जैसी कंपनियों से मुकाबला करती है। निवेशकों को अब कंपनी के नए IFSC सब्सिडियरी के प्रदर्शन, डोमेस्टिक मार्केट में रेवेन्यू ग्रोथ को फिर से पटरी पर लाने की रणनीति और नए लेबर कोड्स के लॉन्ग-टर्म असर पर नजर रखनी होगी।
