Dev Accelerator शेयरहोल्डर्स ने प्रमोटर्स की हिस्सेदारी बढ़ाने को दी हरी झंडी
Dev Accelerator Limited के शेयरधारकों ने कंपनी के प्रमोटर्स के प्रति अपना विश्वास और समर्थन दिखाया है। कंपनी के प्रमोटर्स की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कन्वर्टिबल वारंट्स (convertible warrants) और इक्विटी शेयर्स (equity shares) जारी करने के विशेष प्रस्तावों को शेयरधारकों ने भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। यह मूव कंपनी की रणनीतिक दिशा में प्रमोटर्स की मजबूत प्रतिबद्धता और विश्वास को दिखाता है।
अहम वोटिंग अप्रूवल्स
23 अप्रैल 2026 को हुई शेयरहोल्डर वोटिंग में, Dev Accelerator Limited के निवेशकों ने दो विशेष प्रस्तावों पर जबरदस्त समर्थन दिखाया। इसके तहत, प्रमोटर्स को प्रीफरेंशियल बेसिस पर 17,059,100 कन्वर्टिबल वारंट्स इश्यू करने के प्रस्ताव को 99.9843% वोटों का अप्रूवल मिला। वहीं, प्रमोटर ग्रुप को इसी तरह 35,656,805 इक्विटी शेयर्स (equity shares) जारी करने के प्रस्ताव को 99.9955% शेयरहोल्डर्स का समर्थन हासिल हुआ। ये अप्रूवल्स मार्च 2026 में कंपनी बोर्ड द्वारा फंड जुटाने के लिए लिए गए फैसले के अनुरूप हैं, जिसमें प्रमोटर्स की भागीदारी शामिल थी।
यह क्यों मायने रखता है?
शेयरधारकों का यह मजबूत समर्थन Dev Accelerator के प्रमोटर ग्रुप की कंपनी के भविष्य की संभावनाओं और रणनीतिक योजना पर गहरी आस्था को जाहिर करता है। प्रमोटर्स की हिस्सेदारी में यह बढ़ोतरी न केवल उनके विश्वास को दर्शाती है, बल्कि कंपनी के लिए एक संभावित कैपिटल इनफ्यूजन (capital infusion) का भी संकेत देती है, जिससे आगामी पहलों के लिए कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।
कंपनी की पृष्ठभूमि
Dev Accelerator, जो अपने DevX ब्रांड के नाम से जानी जाती है, भारत के फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस सेक्टर में एक अहम कंपनी है। इसने सितंबर 2025 में अपना IPO सफलतापूर्वक पूरा किया था, जिसके ज़रिये लगभग ₹143.35 Cr जुटाए गए थे। इससे पहले, मार्च 2026 में, कंपनी के बोर्ड ने प्रमोटर्स और नॉन-प्रमोटर्स दोनों से फंड जुटाने के लिए लगभग ₹34.99 Cr के प्रीफरेंशियल इश्यू प्लान को मंजूरी दी थी।
कंपनी के लिए इसके मायने
इस डेवलपमेंट के साथ, प्रमोटर ग्रुप Dev Accelerator Ltd में अपनी कुल शेयरहोल्डिंग बढ़ाने के लिए तैयार है, जो उनके वित्तीय और रणनीतिक निवेश को और पुख्ता करेगा। अब निवेशक इन इश्यूज के अंतिम नियमों और शर्तों पर बारीकी से नज़र रखेंगे। नए फंड के आने से कंपनी की कैपिटल स्ट्रक्चर (capital structure) में भी समायोजन होगा।
आगे क्या देखना होगा
निवेशक अब वारंट्स और शेयर्स की फाइनल अलॉटमेंट डेट्स, कन्वर्जन प्राइस (conversion price) और इश्यू प्राइस (issue price) पर नज़र रखेंगे। अलॉटमेंट के बाद प्रमोटर होल्डिंग परसेंटेज में होने वाले बदलाव और फंड के इस्तेमाल को लेकर कंपनी का कमेंट्री भी महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, कंपनी की कैपिटल स्ट्रक्चर और डेट-टू-इक्विटी रेशियो (debt-to-equity ratio) पर पड़ने वाले असर का आकलन करना भी अहम होगा।
