बायबैक से शेयरहोल्डर्स को क्या होगा फायदा?
Cyient कंपनी के पास मौजूद अतिरिक्त कैश (Excess Cash) को शेयरहोल्डर्स को वापस लौटाने के लिए यह बायबैक करने जा रही है। इस प्रक्रिया के तहत, कंपनी 64 लाख इक्विटी शेयर्स (Equity Shares) तक वापस खरीद सकती है। बायबैक के बाद कंपनी के कुल शेयर्स की संख्या कम हो जाएगी, जिससे प्रति शेयर आय (EPS - Earnings Per Share) और इक्विटी पर रिटर्न (ROE - Return on Equity) जैसे अहम फाइनेंशियल मेट्रिक्स में सुधार हो सकता है। शेयरहोल्डर्स को अपने शेयर कंपनी को प्रीमियम (Premium) पर बेचने का मौका मिलेगा।
लीडरशिप में स्थिरता का भरोसा
कंपनी ने कृष्णा बोडानपु को 3 अप्रैल, 2026 से 3 अप्रैल, 2029 तक, यानी अगले 3 साल के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और एग्जीक्यूटिव वाइस-चेयरमैन के रूप में फिर से नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा है। लीडरशिप में यह स्थिरता, खासकर तेजी से बदलते टेक्नोलॉजी सर्विसेज सेक्टर में, कंपनी की रणनीति को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शेयरहोल्डर की मंजूरी जरूरी
इस बायबैक योजना को आगे बढ़ाने के लिए कंपनी को शेयरहोल्डर्स की मंजूरी की जरूरत होगी। इसके लिए 12 मई, 2026 से 10 जून, 2026 तक पोस्टल बैलेट (Postal Ballot) और ई-वोटिंग (E-voting) के जरिए वोटिंग कराई जाएगी।
Cyient का बिजनेस और विस्तार
Cyient एक ग्लोबल इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस प्रोवाइडर है जो एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव, कम्युनिकेशन और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर्स में काम करती है। कंपनी ने हाल के वर्षों में कुछ अहम अधिग्रहण (Acquisitions) भी किए हैं, जैसे 2023 में Axiscades Aerospace & Technologies को लगभग $300 मिलियन में और Citec Group को €10.3 मिलियन में खरीदना, जिससे इसने एयरोस्पेस और एनर्जी सेक्टर्स में अपनी पैठ मजबूत की है।
कंपनी की फाइनेंशियल पोजीशन
फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) 24 (FY24) में Cyient ने ₹4,992.5 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (Consolidated Revenue) और ₹667.0 करोड़ का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (Profit After Tax) दर्ज किया था। कंपनी का डेट टू इक्विटी रेश्यो (Debt to Equity Ratio) 0.02 जितना कम है, जो बायबैक के लिए आवश्यक फंड्स को मौजूदा रिजर्व से जुटाने की क्षमता को दर्शाता है।
आगे क्या उम्मीद करें?
निवेशक अब शेयरहोल्डर्स की वोटिंग के नतीजों का इंतजार करेंगे। अगर बायबैक को मंजूरी मिलती है, तो निवेशक यह देखेंगे कि कंपनी इसे कब से शुरू करती है और इसके कार्यान्वयन (Implementation) पर क्या और अपडेट आते हैं।
