Creative Newtech FY26: रेवेन्यू में 51% का उछाल, मुनाफा 32% बढ़ा, पर कर्ज की चिंताएँ!
Creative Newtech ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें कंपनी ने अपने रेवेन्यू और मुनाफे में ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है। FY26 के लिए कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 50.85% बढ़कर ₹2,717.51 करोड़ पर पहुँच गया। वहीं, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में 32.35% की वृद्धि देखी गई, जो ₹70.29 करोड़ रहा (पिछले साल यह ₹53.11 करोड़ था)।
Q4 में भी शानदार प्रदर्शन
चौथे तिमाही (Q4 FY26) में भी कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा। इस दौरान कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में 81.16% का उछाल आया और यह ₹740.44 करोड़ पर पहुँच गया। कंसोलिडेटेड प्रॉफिट ₹17.79 करोड़ दर्ज किया गया।
डिविडेंड का ऐलान
इन्वेस्टर्स के लिए एक अच्छी खबर यह भी है कि कंपनी ने FY26 के लिए प्रति शेयर ₹0.50 का डिविडेंड (Dividend) देने का सुझाव दिया है।
ग्रोथ के साथ बढ़ा कर्ज और देनदारियां
जहां रेवेन्यू और प्रॉफिट में यह ग्रोथ प्रभावशाली है, वहीं कंपनी की ग्रोथ स्ट्रैटेजी पर भी बारीक नजरें रहेंगी। इस तेजी का एक बड़ा कारण कंपनी पर बढ़ता कर्ज और ट्रेड रिसीवेबल्स (Trade Receivables) का इजाफा है, जिससे कैश फ्लो पर दबाव की चिंताएं बढ़ गई हैं।
FY26 में कंपनी की बरोइंग्स (Borrowings) यानी कुल कर्ज पिछले साल के ₹69.53 करोड़ से चार गुना से भी ज्यादा बढ़कर ₹324.25 करोड़ हो गया है। इसके अलावा, ट्रेड रिसीवेबल्स भी दोगुने होकर ₹565.11 करोड़ पर पहुँच गए हैं, जो इंगित करता है कि कंपनी को ग्राहकों से यह बड़ी रकम अभी वसूलनी बाकी है। साथ ही, इन्वेंट्री (Inventory) भी ₹105.71 करोड़ से बढ़कर ₹173.45 करोड़ हो गई है, जिससे वर्किंग कैपिटल पर और दबाव बढ़ा है।
कंपनी का बिजनेस और पीयर कंपैरिजन
Creative Newtech मुख्य रूप से आईटी हार्डवेयर डिस्ट्रीब्यूशन और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में काम करती है। कंपनी स्मार्ट होम डिवाइसेज जैसे नए प्रोडक्ट कैटेगरी में भी विस्तार कर रही है। Peer Comparison की बात करें तो, Creative Newtech की 51% की रेवेन्यू ग्रोथ FY26 में Redington India (जिसकी ग्रोथ करीब 10-15% थी) जैसी कंपनियों से कहीं आगे है। हालांकि, Dixon Technologies जैसे प्रतिस्पर्धी अलग तरह की पूंजी संरचना (Capital Structure) के साथ काम करते हैं।
आगे क्या? मुख्य चिंताएं
अब निवेशकों की निगाहें मैनेजमेंट के उन प्लान्स पर होंगी, जिनसे वे बढ़ते कर्ज को कम कर सकें। साथ ही, कंपनी की ट्रेड रिसीवेबल्स को समय पर वसूलने और वर्किंग कैपिटल को प्रभावी ढंग से मैनेज करने की क्षमता पर भी पैनी नजर रखी जाएगी।