NCLT के आदेश का क्या है मतलब?
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा अपना अंतिम आदेश रिजर्व करना एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक कदम है। इसका मतलब है कि ट्रिब्यूनल ने मर्जर स्कीम से जुड़े सभी पक्षों की दलीलों को सुन लिया है और अब अंतिम मंजूरी पर विचार कर रहा है। नियामक संस्थाओं (statutory authorities) से किसी भी तरह की आपत्ति न आना, इस डील के लिए एक बड़ी बाधा को दूर करता है।
मर्जर की पृष्ठभूमि
Coforge Limited के बोर्ड ने 30 दिसंबर 2024 को इस प्रपोज्ड मर्जर को मंजूरी दी थी, जिसके तहत Coforge, Cigniti Technologies का अधिग्रहण करेगी। Cigniti Technologies के शेयरधारकों ने 6 दिसंबर 2025 को हुए एक वोटिंग में 99.75% बहुमत से इस विलय स्कीम का समर्थन किया था।
शेयर स्वैप रेशियो और उद्देश्य
इस मर्जर स्कीम के तहत, Cigniti Technologies के प्रत्येक 5 इक्विटी शेयर के बदले Coforge का 1 इक्विटी शेयर दिया जाएगा। इस शेयर स्वैप रेशियो (share swap ratio) को PwC Business Consulting Services LLP और KPMG Valuation Services LLP जैसी संस्थाओं की वैल्यूएशन रिपोर्ट के आधार पर तय किया गया है। इस विलय का मुख्य उद्देश्य डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, AI-संचालित एश्योरेंस (assurance) सेवाओं में Coforge की क्षमताओं को बढ़ाना और दोनों कंपनियों के बीच तालमेल (synergies) पैदा करना है।
विलय से क्या होगा?
यह मर्जर तीन बड़े वर्टिकल (verticals) - रिटेल, टेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर - को मजबूत करेगा और Coforge की उत्तरी अमेरिका (North America) में उपस्थिति को और बढ़ाएगा। Cigniti Technologies के शेयरधारक अब कंबाइंड एंटिटी Coforge के शेयरधारक बन जाएंगे, और Cigniti एक अलग लिस्टेड कंपनी के तौर पर अस्तित्व में नहीं रहेगी।
आगे क्या देखना होगा?
अब सबकी निगाहें NCLT के अंतिम आदेश पर टिकी हैं। साथ ही, विलय के बाद दोनों कंपनियों के ऑपरेशंस, टीमों और सिस्टम के स्मूथ इंटीग्रेशन (smooth integration) को लेकर भी नजर रखनी होगी। Coforge, IT सर्विस सेक्टर में TCS, Infosys जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है, और यह मर्जर उसकी बाजार स्थिति को और मजबूत करने में मदद कर सकता है।
मुख्य मर्जर डीटेल्स:
- शेयर स्वैप रेशियो: Cigniti के 5 शेयर पर Coforge का 1 शेयर।
- NCLT ऑर्डर रिजर्व: 27 मार्च 2026।
आगे की राह
NCLT के फाइनल ऑर्डर के बाद, SEBI और स्टॉक एक्सचेंज से जरूरी अप्रूवल की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसके बाद विलय का कार्यान्वयन (implementation) होगा।