सब्सिडियरी की बिक्री और बड़ा घाटा
Cambridge Technology Enterprises (CTE) ने अपनी पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी R.P. Web Apps Private Limited को AKIT IT Consulting Private Limited को ₹6.1 लाख (₹0.61 मिलियन) नकद में बेच दिया है। 06 अप्रैल, 2026 को फाइनल हुई इस डील के साथ ही कंपनी ने सब्सिडियरी से पूरी तरह से एग्जिट कर लिया है।
स्ट्रेटेजिक मूव या मजबूरी?
इस बिक्री के पीछे CTE की अपनी बिजनेस ऑपरेशन्स को स्ट्रीमलाइन करने और मुख्य IT सर्विसेज व AI ट्रांसफॉर्मेशन पर अपना ध्यान केंद्रित करने की रणनीति बताई जा रही है। नॉन-कोर एसेट्स को बेचकर, कंपनी का लक्ष्य ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाना और ग्रोथ वाले एरिया में रिसोर्सेज लगाना है, जिससे ओवरऑल फाइनेंशियल परफॉर्मेंस में सुधार हो सके।
अधिग्रहण की कहानी और असल नुकसान
यह जानना महत्वपूर्ण है कि CTE ने जून 2023 में R.P. Web Apps Private Limited को ₹3 करोड़ (₹30 मिलियन) में एक्वायर किया था। उस समय, R.P. Web Apps ने फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में ₹5.19 करोड़ (₹51.9 मिलियन) का टर्नओवर और ₹54 लाख (₹5.4 मिलियन) का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था। खरीदार, AKIT IT Consulting Private Limited, मई 2023 में ₹50,000 की पेड-अप कैपिटल के साथ इनकॉर्पोरेट हुई थी और FY25 में ₹7.98 लाख का रेवेन्यू रिपोर्ट किया था। 31 मार्च, 2025 तक, बेची गई सब्सिडियरी ने ₹4.84 करोड़ (INR 48.48 मिलियन) का रेवेन्यू और ₹2.98 करोड़ (INR 29.83 मिलियन) की कॉमन इक्विटी रिपोर्ट की थी। ₹6.1 लाख में वर्तमान में हुई यह डिवेस्टमेंट, ओरिजिनल अधिग्रहण लागत की तुलना में एक महत्वपूर्ण नुकसान को दर्शाता है।
कंपनी की चुनौतियां और गवर्नेंस
Cambridge Technology Enterprises हाल के वर्षों में कई चुनौतियों से जूझ रही है। कंपनी के शेयर की कीमत में पिछले एक दशक से गिरावट देखी जा रही है, जिसका कारण कमजोर अर्निंग परफॉर्मेंस, डेट सर्विसिंग इश्यूज और अस्थिर मार्जिन बताए जाते हैं। हाल ही में कंपनी में गवर्नेंस से जुड़े बदलाव भी हुए हैं, जिसमें एक की मैनेजरियल पर्सोनल का एग्जिट और एक नए होल-टाइम डायरेक्टर की नियुक्ति की प्रक्रिया शामिल है। एक सब्सिडियरी को इतने बड़े नुकसान में बेचना, एसेट मैनेजमेंट और वैल्यूएशन प्रथाओं पर भी सवाल खड़े कर सकता है।
इंडस्ट्री ट्रेंड के साथ तालमेल?
वहीं, Tata Consultancy Services (TCS), Infosys और Wipro जैसे बड़े इंडियन IT प्लेयर्स अपनी डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, AI और क्लाउड सर्विसेज के पोर्टफोलियो को लगातार बढ़ा रहे हैं। हालांकि ये कंपनियां बहुत बड़े पैमाने पर काम करती हैं, लेकिन CTE का नॉन-कोर एसेट्स को बेचने का यह कदम इंडस्ट्री के उस ट्रेंड के अनुरूप है, जिसमें कंपनियां हाई-ग्रोथ वाले, संभावित रूप से हाई-मार्जिन सेगमेंट्स पर रिसोर्सेज को फोकस कर रही हैं।
निवेशकों की नजर कहां?
इस डिवेस्टमेंट के बाद निवेशक कई अहम पहलुओं पर नजर रखेंगे। इनमें स्टॉक एक्सचेंज द्वारा डिवेस्टमेंट की औपचारिक मंजूरी, स्ट्रेटेजिक इम्प्लिकेशन्स पर मैनेजमेंट की कमेंट्री, पोर्टफोलियो ऑप्टिमाइजेशन के लिए CTE की भविष्य की योजनाएं, बिक्री के असर को डिटेल करने वाले किसी भी अतिरिक्त फाइनेंशियल डिस्क्लोजर और कंपनी की मुख्य IT सर्विसेज व AI ट्रांसफॉर्मेशन ऑफर्स की परफॉर्मेंस शामिल हैं।
