सेबी (SEBI) का 'लार्ज कॉर्पोरेट' (Large Corporate - LC) फ्रेमवर्क भारतीय कॉर्पोरेट डेट मार्केट को मजबूत बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह फ्रेमवर्क 2018 में स्थापित किया गया था और अक्टूबर 2023 में इसमें संशोधन किया गया। इस फ्रेमवर्क के तहत, कुछ चुनिंदा कंपनियों को खास नियमों के तहत ही फंड जुटाने की अनुमति है। 63 Moons Technologies लिमिटेड की वर्तमान फाइनेंशियल पोजीशन और क्रेडिट रेटिंग ऐसे नहीं हैं कि वह इस 'लार्ज कॉर्पोरेट' की कैटेगरी में आ सके।
दरअसल, सेबी के नियमों के अनुसार, 'लार्ज कॉर्पोरेट' के तौर पर वर्गीकृत होने के लिए कंपनी की लॉन्ग-टर्म बॉरोइंग्स (Long-term Borrowings) कम से कम ₹1,000 करोड़ होनी चाहिए, जबकि पहले यह सीमा ₹100 करोड़ थी। साथ ही, कंपनी का क्रेडिट रेटिंग भी 'AA' या उससे ऊपर होना अनिवार्य है। 63 Moons Technologies इन तय मापदंडों पर खरी नहीं उतरी है।
इस 'नॉन-लार्ज कॉर्पोरेट' स्टेटस का सीधा मतलब यह है कि 63 Moons Technologies को सेबी के उन कड़े नियमों से छूट मिल गई है, जो 'लार्ज कॉर्पोरेट' कंपनियों पर लागू होते हैं। इन नियमों में से एक महत्वपूर्ण है कि 'लार्ज कॉर्पोरेट' कंपनियों को अगले तीन साल में कम से कम 25% फंड जुटाना लिस्टेड डेट सिक्योरिटीज के जरिए होता है। इस छूट के मिलने से 63 Moons Technologies अपनी फाइनेंसिंग स्ट्रैटेजी तय करने में ज्यादा स्वतंत्र है और फंड जुटाने के लिए व्यापक विकल्प तलाश सकती है।
63 Moons Technologies लिमिटेड एक भारतीय टेक्नोलॉजी फर्म है जो डिजिटल मार्केटप्लेस के लिए प्लेटफॉर्म और सॉल्यूशंस प्रदान करती है। इसके बिजनेस में ट्रेडिंग सॉल्यूशंस, मार्केट डेटा, रिस्क मैनेजमेंट और पेमेंट सर्विसेज शामिल हैं।
हालांकि, फंड जुटाने में मिली इस फ्लेक्सिबिलिटी के बीच, 63 Moons Technologies के पिछले गवर्नेंस और ट्रांसपेरेंसी रिकॉर्ड पर भी ध्यान देना ज़रूरी है। कंपनी को फरवरी 2026 में डिस्क्लोजर कंप्लायंस ब्रीच (Disclosure Compliance Breach) के लिए BSE और NSE से वॉर्निंग लेटर मिले थे। इससे पहले, सेबी ने MCX (जो कि 63 Moons Technologies की पूर्व एसोसिएट कंपनी थी) पर मई 2025 में 63 Moons Technologies को किए गए भारी पेमेंट्स के पर्याप्त डिस्क्लोजर न होने पर ₹25 लाख का जुर्माना भी लगाया था।
अगर पीयर कंपनियों से तुलना करें, तो Reliance Industries Limited जैसी बड़ी कंपनियां 'लार्ज कॉर्पोरेट' की कैटेगरी में आती हैं और उन्हें सेबी के डेट इश्यूअंस नॉर्म्स का पालन करना पड़ता है। वहीं, Welterman International Ltd. जैसी कुछ अन्य कंपनियों ने भी 'नॉन-एलसी' स्टेटस की पुष्टि की है।
निवेशक अब 63 Moons Technologies के भविष्य के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस, मार्केट कैप और नेट वर्थ में होने वाले बदलावों पर बारीकी से नजर रखेंगे। इसके अतिरिक्त, कंपनी की डेट फाइनेंसिंग स्ट्रैटेजी और सेबी द्वारा 'लार्ज कॉर्पोरेट' वर्गीकरण के मानदंडों में किए जा सकने वाले संभावित बदलाव भी महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
