शेयरधारकों के लिए वोटिंग आज से
Vikas Lifecare Limited ने शेयरधारकों के लिए दो अहम प्रस्ताव पेश किए हैं। कंपनी ₹99.05 करोड़ का फंड जुटाने के लिए 61,90,62,500 फुली कन्वर्टिबल वारंट्स प्रिफरेंशियल बेसिस पर इश्यू करने जा रही है, जिसकी कीमत ₹1.60 प्रति वारंट तय की गई है। इसके अलावा, कंपनी अपना अधिकृत शेयर कैपिटल ₹235 करोड़ से बढ़ाकर ₹300 करोड़ करने की योजना बना रही है। इन प्रस्तावों पर शेयरधारकों की ई-वोटिंग 16 अप्रैल 2026 से 15 मई 2026 तक चलेगी।
फंड जुटाने का मकसद
इस कैपिटल रेज़ (Capital Raise) का मुख्य उद्देश्य कंपनी के वर्किंग कैपिटल को मजबूत करना और सामान्य कॉर्पोरेट ज़रूरतों को पूरा करना है। यह फंड कंपनी की दिन-प्रतिदिन की लिक्विडिटी (Liquidity) को बढ़ाएगा और मौजूदा बिजनेस एक्टिविटीज को सपोर्ट करेगा। अधिकृत शेयर कैपिटल में वृद्धि भविष्य में वारंट्स को इक्विटी शेयर्स में बदलने के लिए ज़रूरी है।
कंपनी की वित्तीय स्थिति
1995 में स्थापित, Vikas Lifecare (पहले Vikas Multicorp) पहले भी कैपिटल जुटाने के लिए प्रिफरेंशियल वारंट्स का इस्तेमाल कर चुकी है। कंपनी पॉलिमर्स, केमिकल्स, एग्रो प्रोडक्ट्स और स्मार्ट मीटरिंग जैसे कई सेगमेंट्स में काम करती है। हालांकि, कंपनी हालिया तिमाही में फाइनेंशियल चुनौतियों से जूझ रही है। Q1 FY25 में कंपनी ने ₹2.82 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया था। साथ ही, कंपनी के कैश साइकिल (Cash Cycle) में भी नरमी और इंटरेस्ट कवरेज रेशियो (Interest Coverage Ratios) में गिरावट देखी गई है।
शेयरधारकों की मंजूरी का असर
अगर शेयरधारक इन प्रस्तावों को मंजूरी दे देते हैं, तो कंपनी को वर्किंग कैपिटल और कॉर्पोरेट खर्चों के लिए ₹99.05 करोड़ का फंड मिल सकता है। अधिकृत शेयर कैपिटल ₹300 करोड़ तक बढ़ जाएगा, जिससे भविष्य में शेयर्स इश्यू करने का रास्ता साफ होगा। हालांकि, शेयरधारकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि वारंट्स के कन्वर्जन पर भविष्य में शेयर डाइल्यूशन (Share Dilution) का खतरा रहता है।
मुख्य जोखिम और रेगुलेटरी मुद्दे
इस कैपिटल रेज़ को पूरा करने के लिए कंपनी को स्टॉक एक्सचेंजों और अन्य रेगुलेटरी बॉडीज़ (Regulatory Bodies) से अप्रूवल (Approval) की ज़रूरत होगी। कंपनी को 27 मार्च 2026 को ₹22.99 करोड़ का इनकम टैक्स डिमांड ऑर्डर (Income Tax Demand Order) भी मिला है। फरवरी 2025 में, SEBI ने नॉन-डिस्क्लोजर (Non-Disclosure) के आरोपों पर कंपनी पर ₹200,000 का जुर्माना लगाया था, हालांकि बाद में SEBI ने एक अलग मामले में कंपनी को बरी कर दिया था। वारंट्स की वैलिडिटी (Validity) आमतौर पर अलॉटमेंट के 18 महीने तक होती है, जिसके बाद वे लैप्स (Lapse) हो जाते हैं।
इंडस्ट्री के दूसरे खिलाड़ी
यह कंपनी Supreme Industries Ltd., Time Technoplast Ltd., और Xpro India Ltd. जैसी कंपनियों के साथ समान सेक्टर्स में काम करती है।