SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने UltraTech Cement के शेयरधारकों के लिए एक विशेष एक साल की विंडो की घोषणा की है। यह विंडो 5 फरवरी 2026 से 4 फरवरी 2027 तक सक्रिय रहेगी। इसका मुख्य उद्देश्य उन शेयरधारकों को उनके पुराने फिजिकल शेयर सर्टिफिकेट को Dematerialised (Demat) फॉर्मेट में बदलने का अवसर देना है, जिनकी ट्रांसफर रिक्वेस्ट 1 अप्रैल 2019 से पहले की गई थी, लेकिन डॉक्यूमेंटेशन से जुड़ी दिक्कतों के चलते प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई थी। इस स्पेशल विंडो के तहत बदले गए सभी शेयर Demat फॉर्मेट में ही जारी किए जाएंगे और Dematerialisation की तारीख से 1 साल के लिए लॉक-इन अवधि में रहेंगे।
SEBI का यह कदम शेयरहोल्डिंग रिकॉर्ड को सुव्यवस्थित करने, पारदर्शिता बढ़ाने और सभी निवेशकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने के मक़सद से उठाया गया है। UltraTech Cement में पहले से ही बड़ी मात्रा में, यानी 31 दिसंबर 2025 तक कुल शेयर कैपिटल का 99.67% हिस्सा Demat फॉर्म में है। यह स्पेशल विंडो पुराने फिजिकल होल्डिंग्स के बाकी बचे छोटे हिस्से और विशेष मामलों को सुलझाने में मदद करेगी। SEBI ने 1 अप्रैल 2019 से शेयर्स के ट्रांसफर के लिए Demat फॉर्मेट को अनिवार्य कर दिया था, ताकि धोखाधड़ी और कागजी कार्रवाई के जोखिमों को कम किया जा सके।
इसके समानांतर, UltraTech Cement हाल ही में कुछ बड़े टैक्स मामलों में भी उलझी है। कंपनी को दिसंबर 2025 में ₹782.2 करोड़ का एक बड़ा GST (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) डिमांड नोटिस मिला है। इसके अलावा, 2026 की शुरुआत में विभिन्न राज्य प्राधिकरणों से ₹100 करोड़ से अधिक के अन्य टैक्स डिमांड नोटिस भी जारी हुए हैं। ये नोटिस इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit - ITC) के कथित दुरुपयोग और टैक्स देनदारी से संबंधित बताए गए हैं। UltraTech Cement ने इन नोटिसों को कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है और उम्मीद जताई है कि इसका कंपनी पर कोई बड़ा फाइनेंशियल असर नहीं पड़ेगा।
UltraTech Cement सीमेंट इंडस्ट्री की एक प्रमुख कंपनी है, जो Ambuja Cement, Shree Cement, ACC Limited और Dalmia Bharat जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है। जहां यह Dematerialisation विंडो एक कंपनी-विशिष्ट नियामक पहल है, वहीं पूरे सेक्टर में डिजिटल शेयरहोल्डिंग की ओर बढ़ने का रुझान लगातार जारी है।
