SEBI के नियमों से बड़ी राहत
UTL Industries Limited ने 13 अप्रैल, 2026 को जारी एक बयान में कन्फर्म किया है कि 31 मार्च, 2026 तक कंपनी SEBI के 'लार्ज कॉर्पोरेट' की परिभाषा में फिट नहीं बैठती है। इस वजह से, कंपनी 26 नवंबर, 2018 के SEBI सर्कुलर के तहत फाइनेंशियल ईयर 2025-2026 के लिए अपने किसी भी अतिरिक्त बरोइंग्स (incremental borrowings) की जानकारी सार्वजनिक करने के लिए बाध्य नहीं होगी।
रेगुलेटरी बैकग्राउंड
SEBI का यह सर्कुलर भारतीय कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को बढ़ावा देने के मकसद से लाया गया था। इसके तहत 'लार्ज कॉर्पोरेट' को अपनी बरोइंग्स का एक निश्चित हिस्सा डेट सिक्योरिटीज (debt securities) के जरिए जुटाना होता है। 'लार्ज कॉर्पोरेट' कैटेगरी में न आने के कारण, UTL Industries इस खास डिस्क्लोजर (disclosure) की जरूरत से बच गई है। यह कन्फर्मेशन कंपनी के बरोइंग डिस्क्लोजर दायित्वों को स्पष्ट करता है।
SEBI का 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क
SEBI ने 26 नवंबर, 2018 को एक सर्कुलर के जरिए 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क पेश किया था। इसका उद्देश्य डेट मार्केट को मजबूत करना और कंपनियों की बैंकों पर निर्भरता कम करना था। इस कैटेगरी में आने के लिए, किसी लिस्टेड कंपनी (बैंकों को छोड़कर) के पास लिस्टेड सिक्योरिटीज होनी चाहिए, फाइनेंशियल ईयर के अंत तक कम से कम ₹100 करोड़ की आउटस्टैंडिंग लॉन्ग-टर्म बरोइंग्स होनी चाहिए, और क्रेडिट रेटिंग 'AA' या उससे ऊपर की होनी चाहिए। ऐसी कंपनियां अपनी एडिशनल बरोइंग्स का कम से कम 25% डेट सिक्योरिटीज इश्यू करके जुटाने के लिए बाध्य होती हैं।
UTL Industries के लिए इसका क्या मतलब है?
- UTL Industries, SEBI के 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क के तहत FY 2025-2026 के लिए एडिशनल बरोइंग्स डिस्क्लोज करने की वार्षिक आवश्यकता से मुक्त है।
- कंपनी को इस विशेष डिस्क्लोजर से जुड़ी प्रक्रियात्मक कदमों से राहत मिली है।
- यह स्टेटस कन्फर्म करता है कि UTL Industries उस सीमा से नीचे काम करती है, जिसके तहत पब्लिक डेट इश्यू के माध्यम से महत्वपूर्ण बरोइंग्स की आवश्यकता होती है।