सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने Riddhi Siddhi Gluco Biols Limited के मामले में सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) के 9 मार्च, 2026 के आदेश को बरकरार रखा है। इस फैसले के साथ, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा कंपनी और उसके 2 प्रमोटर डायरेक्टर्स पर लगाए गए कुल ₹15 लाख के जुर्माने की पुष्टि हो गई है। ये जुर्माने कंपनी के Minimum Public Shareholding (MPS) नियमों के उल्लंघन और अतीत में कंपनी को डीलिस्ट (Delist) करने की कोशिश के दौरान धोखाधड़ी वाले ट्रेडिंग (Fraudulent Trading) के आरोपों से संबंधित हैं।
क्या हैं मुख्य आरोप?
SEBI की जांच में पाया गया था कि Riddhi Siddhi Gluco Biols ने Minimum Public Shareholding (MPS) के नियमों का पालन नहीं किया था। इसके अलावा, कंपनी पर यह भी आरोप लगा कि उसने डीलिस्टिंग प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए शेयर बाजार में कृत्रिम तरलता (Artificial Liquidity) बनाने के लिए धोखाधड़ी वाले ट्रेडिंग का सहारा लिया। SEBI ने मूल रूप से कंपनी पर ₹5 लाख और प्रत्येक प्रमोटर डायरेक्टर पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया था, जो कुल मिलाकर ₹15 लाख होता है। SAT ने पहले अपने आदेश में कुछ डिबारमेंट (Debarment) अवधि को कम किया था, लेकिन MPS उल्लंघन और धोखाधड़ी वाले ट्रेडिंग के आरोपों को सही ठहराया था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इस मामले में अंतिम नियामक (Regulatory) निर्णय आ गया है।
आगे क्या होगा?
इस सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब है कि Riddhi Siddhi Gluco Biols अब SAT के आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य है। कंपनी को न केवल ₹15 लाख का पूरा जुर्माना भरना होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उसके पब्लिक शेयरहोल्डिंग (Public Shareholding) के नियम निर्धारित न्यूनतम स्तरों को पूरा करते हों। यह निर्णय भारतीय शेयर बाजार में नियमों के कड़े अनुपालन के महत्व को और रेखांकित करता है।
