सेक्रेटेरियल कंप्लायंस रिपोर्ट में क्या खुला?
Mahesh Gupta & Co. द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट के मुताबिक, Reganto Enterprises Ltd ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान SEBI के कई नियमों का पालन ठीक से नहीं किया। कंपनी पर स्टैच्यूटरी फाइलिंग और फीस पेमेंट में देरी करने के साथ-साथ बोर्ड और कमेटियों की कंपोजिशन से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। इन गैर-अनुपालन (non-compliance) की घटनाओं के लिए कंपनी पर काफी भारी जुर्माना लगाया गया है।
गवर्नेंस में बड़ी खामियां, लाखों का जुर्माना
रिपोर्ट में सामने आया है कि Reganto Enterprises पिछले काफी समय से गंभीर गवर्नेंस समस्याओं से जूझ रही थी। कंपनी एक लंबे अरसे तक बिना इंडिपेंडेंट महिला डायरेक्टर के काम करती रही और चेयरपर्सन के बिना भी काफी समय बीता। इन गंभीर उल्लंघनों के चलते, अकेले फाइनेंशियल रिजल्ट्स में देरी के लिए कंपनी पर कुल ₹31,09,300 का भारी जुर्माना लगाया गया है। इसमें फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के रिजल्ट्स और फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की दूसरी, तीसरी और चौथी तिमाही के रिजल्ट्स की देरी शामिल है।
और क्या-क्या हुआ लेट?
सिर्फ फाइनेंशियल रिजल्ट्स ही नहीं, कंपनी की दूसरी फाइलिंग भी लेट हुईं। Q4 FY25 के लिए स्टेटमेंट ऑफ इन्वेस्टर कंप्लेंट्स की लेट सबमिशन के लिए ₹51,920 का जुर्माना लगा। इसके अलावा, फाइनेंशियल ईयर 2024-25 और 2025-26 के लिए एनुअल स्टॉक एक्सचेंज लिस्टिंग फीस का भुगतान भी देर से किया गया। शेयरहोल्डिंग पैटर्न और पिछले पीरियड के लिए सेक्रेटेरियल कंप्लायंस रिपोर्ट को भी समय पर दाखिल नहीं किया गया।
ऑडिटर के इस्तीफे पर भी चूक
कंपनी ने ऑडिटर के इस्तीफे से जुड़ी मास्टर सर्कुलर का भी पालन नहीं किया। इसमें एक स्टैच्यूटरी ऑडिटर के इस्तीफे की सूचना देने में भी देरी की गई। इसके अलावा, मार्च 2025 से अप्रैल 2026 तक कंपनी में इंडिपेंडेंट महिला डायरेक्टर की गैरमौजूदगी रही और अप्रैल 2026 तक चेयरपर्सन का पद भी खाली रहा।
निवेशकों को क्या देखना होगा?
Reganto Enterprises को अब अपनी रेगुलेटरी जिम्मेदारियों को पूरा करने में आ रही दिक्कतों को दूर करना होगा। कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में सभी स्टैच्यूटरी और फाइनेंशियल फाइलिंग समय पर जमा हों। साथ ही, SEBI के नियमों के अनुसार बोर्ड कंपोजिशन, खासकर इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स और चेयरपर्सन की नियुक्ति को लेकर नियमों का पालन करना होगा। निवेशकों को आगे चलकर कंपनी की फाइलिंग डेडलाइन, फीस पेमेंट और बोर्ड कंपोजिशन के अनुपालन पर नज़र रखनी चाहिए।