SEBI के 'Large Corporate' नियम से Orient Tradelink को मिली बड़ी राहत
Orient Tradelink Ltd. ने स्टॉक एक्सचेंज BSE को आधिकारिक तौर पर बताया है कि वह SEBI के 'Large Corporate' (LC) के दायरे में नहीं आती है। 31 मार्च, 2026 तक कंपनी की वित्तीय स्थिति के आधार पर यह पुष्टि की गई है। इस घोषणा के बाद, कंपनी SEBI के उन नियमों से बच गई है जो बड़े कॉरपोरेट्स को अनिवार्य रूप से डेट (debt) जारी करने के लिए बाध्य करते हैं।
SEBI का 'Large Corporate' ढांचा क्या है?
SEBI का 'Large Corporate' फ्रेमवर्क कॉर्पोरेट डेट मार्केट को मजबूत करने के उद्देश्य से बनाया गया है। इस ढांचे के तहत, आमतौर पर उन कंपनियों को LC माना जाता है जिनकी ₹1,000 करोड़ या उससे अधिक की लॉन्ग-टर्म बोरिंग्स (long-term borrowings) होती हैं और जिनका क्रेडिट रेटिंग 'AA' या उससे बेहतर होता है। इन कंपनियों को अपनी कुल बोरिंग्स का एक निश्चित हिस्सा डेट सिक्योरिटीज (debt securities) के माध्यम से जुटाना पड़ता है।
नियमों में हुए बदलाव
SEBI ने 19 अक्टूबर, 2023 को जारी एक सर्कुलर के ज़रिए 'Large Corporate' बनने के लिए लॉन्ग-टर्म बोरिंग्स की न्यूनतम सीमा को ₹100 करोड़ से बढ़ाकर ₹1,000 करोड़ कर दिया था। यह नियम 1 अप्रैल, 2024 से प्रभावी है। इसके तहत, पहचानी गई LC कंपनियों को एक निश्चित अवधि में अपनी योग्य बोरिंग्स का कम से कम 25% डेट सिक्योरिटीज के ज़रिए जुटाना अनिवार्य है।
Orient Tradelink पर इसका क्या असर होगा?
'Large Corporate' कैटेगरी में न आने के कारण, Orient Tradelink को अपने फाइनेंस और बोरिंग को मैनेज करने में ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी (flexibility) मिलेगी। कंपनी पर LC के लिए लागू होने वाले विशेष डेट इश्यूएंस (debt issuance) नियमों को मानने की कोई बाध्यता नहीं होगी, जिससे वह अपने फाइनेंसिंग संबंधी फैसले स्वतंत्र रूप से ले सकेगी।
कंपनी की वित्तीय स्थिति
Orient Tradelink मुख्य रूप से Media & Entertainment सेक्टर में काम करती है। ₹60-65 करोड़ के करीब मार्केट वैल्यू और फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए लगभग ₹15.1 करोड़ के रेवेन्यू (revenue) के साथ, कंपनी अपने सेक्टर की छोटी कंपनियों में से एक है। इस आकार को देखते हुए, 'Large Corporate' वर्गीकरण के लिए ₹1,000 करोड़ की बोरिंग सीमा को पूरा करना कंपनी के लिए मुश्किल है।
पिछला रेगुलेटरी एक्शन
यह भी ध्यान देने योग्य है कि SEBI ने अतीत में Orient Tradelink से जुड़े एक मामले में रेगुलेटरी कार्रवाई की थी। कंपनी से संबंधित टेकओवर नियमों के उल्लंघन के लिए SEBI ने एक व्यक्ति पर ₹4.9 करोड़ का जुर्माना लगाया था।