कंपनी के डायरेक्टर्स, की मैनेजेरियल स्टाफ और उन सभी कर्मचारियों के लिए यह 'ट्रेडिंग विंडो' प्रतिबंधित रहेगी, जिन्हें कंपनी की गैर-सार्वजनिक, मूल्य-संवेदनशील (price-sensitive) जानकारी तक पहुंच है। यह कवायद SEBI (Prohibition of Insider Trading) Regulations, 2015 के तहत की जा रही है, जिसका मकसद किसी भी अंदरूनी जानकारी के संभावित दुरुपयोग को रोकना है।
'ट्रेडिंग विंडो' बंद करना कॉर्पोरेट गवर्नेंस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सभी निवेशकों को समान अवसर मिले। इनसाइडर्स को अहम जानकारी सार्वजनिक होने से पहले शेयर खरीदने या बेचने से रोककर, यह व्यवस्था मार्केट की निष्पक्षता बनाए रखती है और निवेशकों का भरोसा बढ़ाती है।
यह एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन Maruti Suzuki India रेगुलेटरी जांच के दायरे में भी रही है। अगस्त 2021 में, कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने Maruti Suzuki पर अपनी "डिस्काउंट कंट्रोल पॉलिसी" के लिए ₹200 करोड़ का जुर्माना लगाया था, जिसे एंटी-कॉम्पिटिटिव माना गया था। यह पिछला जुर्माना सभी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क का कड़ाई से पालन करने के महत्व को रेखांकित करता है।
Tata Motors, Mahindra & Mahindra, और Hyundai Motor India जैसी प्रमुख भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियां भी SEBI द्वारा अनिवार्य 'ट्रेडिंग विंडो' क्लोजर का पालन करती हैं। यह इंडस्ट्री में एक सामान्य चलन है।
निवेशक अब Maruti Suzuki India की ओर से फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के ऑडिटेड सालाना नतीजों की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करेंगे। 'ट्रेडिंग विंडो' इस घोषणा के 48 घंटे बाद फिर से खोल दी जाएगी।
