ट्रेडिंग विंडो क्यों हुई बंद?
यह क्लोजर SEBI के इनसाइडर ट्रेडिंग प्रोहिबिशन रेगुलेशन, 2015 के तहत किया गया है। इसका मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कंपनी के शेयर में अप्रकाशित मूल्य-संवेदनशील जानकारी (UPSI) रखने वाले व्यक्ति ट्रेडिंग न कर सकें। यह सभी निवेशकों के लिए एक लेवल प्लेइंग फील्ड बनाए रखने के लिए जरूरी है।
SEBI की जांच का साया?
Mangalam Global के लिए यह कोई नई बात नहीं है, कंपनी पहले भी अपने Q4 और FY24 नतीजों के लिए ट्रेडिंग विंडो बंद कर चुकी है। हालांकि, हाल के दिनों में SEBI से 29 जनवरी 2025 को एक शो-कॉज नोटिस मिला था। यह नोटिस FY 2019-20 से FY 2021-22 तक के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स के फोरेंसिक ऑडिट से संबंधित PFUTP (धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं का निषेध) रेगुलेशन के कथित उल्लंघन को लेकर था। कंपनी और संबंधित व्यक्तियों ने मार्च 2025 में SEBI को एक प्रारंभिक सबमिशन और सेटलमेंट एप्लीकेशन दिया था, जिसका नतीजा अभी आना बाकी है।
एक अलग डेवलपमेंट में, 24 मार्च 2026 को Mangalam Global ने NSE और BSE से 10 लाख शेयरों के लिए राधिका बंसल को 'प्रमोटर ग्रुप' से 'पब्लिक' शेयरहोल्डर कैटेगरी में रीक्लासिफाई (reclassify) करने की मंजूरी हासिल की।
निवेशकों के लिए मुख्य जोखिम?
निवेशक इस समय चल रही SEBI जांच के नतीजों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। PFUTP आरोपों से संबंधित सेटलमेंट एप्लीकेशन का समाधान एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। इसके अलावा, FY26 के वास्तविक फाइनेंशियल परफॉर्मेंस, जो विंडो खुलने के बाद पता चलेंगे, निवेशक सेंटिमेंट के लिए अहम साबित होंगे।
Mangalam Global एग्रीबिजनेस, एडिबल ऑयल और कमोडिटी ट्रेडिंग सेक्टर में काम करती है। इस सेक्टर में Kaveri Seed Co. और LT FOODS जैसी कंपनियां इसके पीयर्स (peers) मानी जाती हैं।
