SEBI के नियमों से मिली छूट
SEBI के नियमों के तहत, बड़ी कंपनियों को अपने नए कर्ज का एक निश्चित हिस्सा डेट सिक्योरिटीज के ज़रिए उठाना पड़ता है, ताकि कॉर्पोरेट डेट मार्केट को बढ़ावा मिल सके। लेकिन MT Educare Limited ने साफ किया है कि वह 31 मार्च, 2026 तक इस कैटेगरी में नहीं आती है। कंपनी ने इसके पीछे 16 दिसंबर, 2022 से शुरू हुई कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) का हवाला दिया है। इस वजह से, MT Educare पर 'Large Corporate' के लिए लागू होने वाली ये खास फंड जुटाने की बाध्यताएं लागू नहीं होंगी।
यह छूट क्यों मायने रखती है?
यह राहत कंपनी की वित्तीय सेहत में सुधार का संकेत नहीं है, बल्कि यह उसकी मौजूदा इन्सॉल्वेंसी स्थिति का सीधा परिणाम है। SEBI की 'Large Corporate' फ्रेमवर्क का मकसद लिस्टेड कंपनियों को डेट मार्केट में ज़्यादा सक्रिय करना है। MT Educare इस दायरे से बाहर है, जिसका सीधा मतलब है कि कंपनी को अभी अपनी इन्सॉल्वेंसी की कार्यवाही पर ही ध्यान केंद्रित करना होगा।
कंपनी की इन्सॉल्वेंसी पृष्ठभूमि
शिक्षा क्षेत्र की कंपनी MT Educare, 16 दिसंबर, 2022 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के आदेश के बाद CIRP में चली गई थी। यह केस ऑपरेशनल क्रेडिटर कनेक्ट रेसिडुअरी प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर शुरू हुआ था। अगस्त 2023 में क्रेडिटर्स की कमेटी (CoC) का गठन हुआ और जनवरी 2024 में अरिहंत नेनावटी को रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त किया गया। कंपनी पर कुल ₹22,919.13 लाख से ज़्यादा के दावे आए हैं, जिनमें से ₹9,498.87 लाख के दावों को स्वीकार किया गया है। MT Educare पर प्रूडेंस ARC और एक्सिस बैंक जैसे लैंडर्स का भी काफी कर्ज बकाया है। कंपनी के ऑडिटर ने भी गोइंग कंसर्न (लगातार चलते रहने की क्षमता) को लेकर अनिश्चितता जताई है और फाइनेंस को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। फाउंडर महेश शेट्टी के खिलाफ भी इन्सॉल्वेंसी की कार्यवाही चल रही है।
आगे क्या देखना होगा?
फिलहाल, शेयरधारकों के लिए यह जानना ज़रूरी है कि यह छूट एक प्रक्रियात्मक कदम है। कंपनी की नज़रें NCLT के फैसले पर टिकी हैं, जहां रेज़ोल्यूशन प्लान को मंजूरी मिलनी है। इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया का नतीजा, ऑडिटर की चेतावनियां और कर्ज चुकाने में जारी दिक्कतें कंपनी के लिए बड़े जोखिम बने हुए हैं। ₹9.24 करोड़ के मार्केट कैप वाली MT Educare की तुलना में CL Educate Ltd (मार्केट कैप ₹2641 करोड़) और NIIT Learning (मार्केट कैप ₹3810 करोड़) जैसे दूसरे प्लेयर्स की स्थिति फिलहाल बेहतर दिख रही है। आगे NCLT के फैसले और CIRP की प्रगति पर बारीकी से नज़र रखनी होगी।
