ट्रेडिंग विंडो क्यों बंद की गई?
यह कदम SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के नियमों के तहत उठाया गया है। इसका मुख्य मकसद इनसाइडर ट्रेडिंग को रोकना है। यानी, कंपनी के अंदरूनी लोग, जो नतीजों जैसी गोपनीय और कीमत-संवेदनशील जानकारी रखते हैं, वे सार्वजनिक होने से पहले कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री न कर सकें। यह बाजार की निष्पक्षता और अखंडता बनाए रखने के लिए ज़रूरी है।
किन पर लागू होंगे ये प्रतिबंध?
यह ट्रेडिंग विंडो बंद होने का नियम कंपनी के सभी डायरेक्टर्स, डिजग्नेटेड पर्सन्स (यानी वे लोग जो अहम जानकारी तक पहुंच रखते हैं) और उनके क्लोज रिलेटिव्स (निकटतम रिश्तेदारों) पर लागू होगा।
कब दोबारा शुरू होगी ट्रेडिंग?
यह प्रतिबंध तब तक जारी रहेगा जब तक कंपनी 31 मार्च, 2026 को समाप्त हो रहे फाइनेंशियल ईयर (FY26) के लिए अपने ऑडिटेड वित्तीय नतीजों की घोषणा नहीं कर देती। नतीजों की घोषणा के 48 घंटे बाद ही ट्रेडिंग विंडो फिर से खोली जाएगी।
SEBI की भूमिका और नियम
SEBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार, लिस्टेड कंपनियों को ऐसी ट्रेडिंग विंडो क्लोजर लागू करना अनिवार्य है। इन नियमों को समय-समय पर और कड़ा किया गया है, ताकि अंदरूनी लोगों को किसी भी तरह का अनुचित लाभ न मिल सके।
