क्यों बंद की गई ट्रेडिंग विंडो?
यह कदम कंपनी के 'इं*साइडर ट्रेडिंग को रोकने के लिए कोड' (Code for Prevention of Insider Trading) के तहत उठाया गया है। इसका मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी अप्रकाशित, मूल्य-संवेदनशील जानकारी (Unpublished Price-Sensitive Information) का दुरुपयोग न हो सके।
क्या है यह 'ट्रेडिंग विंडो क्लोजर'?
'ट्रेडिंग विंडो क्लोजर' एक ऐसी अवधि होती है जब कंपनी के डायरेक्टर्स, प्रमोटर्स और कुछ खास एम्प्लॉईज़ कंपनी के शेयर्स की खरीद-बिक्री नहीं कर सकते। यह एक स्टैंडर्ड प्रो*सीजर है जो SEBI के नियमों के तहत आता है और मार्केट में फेयरनेस बनाए रखने में मदद करता है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
इस क्लोजर से यह पक्का होता है कि सभी निवेशकों को कंपनी की फाइनेंशियल परफॉरमेंस की जानकारी एक साथ मिले, ताकि किसी को अंदरूनी जानकारी का फायदा न मिल सके। निवेशक अब कंपनी के Q4 FY26 के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं, जो जल्द ही घोषित किए जाएंगे।
इंडस्ट्री प्रैक्टिस
जहाजरानी (Shipping) इंडस्ट्री में यह एक आम बात है। Shipping Corporation of India जैसी अन्य कंपनियाँ भी इसी तरह के नियम फॉलो करती हैं।
