PPMS Real Estates LLP ने Avi Products India Limited के 8,59,769 इक्विटी शेयर खरीदने की योजना बनाई है, जो कंपनी की 26.00% वोटिंग शेयर कैपिटल के बराबर है। प्रति शेयर ₹33.00 के निश्चित भाव पर, इस पूरे सौदे का अनुमानित खर्च लगभग ₹2.84 करोड़ (₹2,83,72,377) है।
यह ओपन ऑफर 13 मई, 2026 को शुरू होगा और 26 मई, 2026 को समाप्त होगा। 28 अप्रैल, 2026 तक रिकॉर्ड में शामिल शेयरधारक इसमें भाग लेने के पात्र होंगे।
PPMS Real Estates LLP ने हाल ही में Avi Products India में शेयर खरीदे थे, जिससे उसकी हिस्सेदारी बढ़ी है। 10 अप्रैल और 21 अप्रैल, 2026 को हुए अधिग्रहण के बाद, SEBI (SAST) रेगुलेशंस, 2011 के तहत यह अनिवार्य ओपन ऑफर लाया गया है। प्रमोटर अविनाश धीरजलाल वोरा ने भी अपनी पूरी सीधी हिस्सेदारी बेच दी है।
यह ऑफर मौजूदा माइनॉरिटी शेयरधारकों (Minority Shareholders) के लिए ₹33.00 प्रति शेयर के भाव पर अपनी हिस्सेदारी बेचने का एक मौका है। इस कदम से कंपनी के संचालन या कैपिटल स्ट्रक्चर (Capital Structure) में संभावित बदलाव और मैनेजमेंट में परिवर्तन की उम्मीद है, जो नियामक (Regulatory) मंजूरियों पर निर्भर करेगा।
Avi Products India Limited, जिसकी स्थापना 1989 में हुई थी, डेंटर कन्ज्यूमेबल्स (Dental Consumables) और मशीनरी के साथ-साथ IFRUIT ब्रांड के तहत आइसक्रीम का व्यवसाय करती है। कंपनी पहले Avi Photochem Limited के नाम से जानी जाती थी।
हालांकि, इस ओपन ऑफर की सफलता के लिए जरूरी रेगुलेटरी मंजूरियां मिलना अहम है। इन मंजूरियों में देरी या विफलता से ऑफर वापस लिया जा सकता है या बढ़ाया जा सकता है। शेयरधारक जो अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं, उन्हें ऑफर अवधि के दौरान मार्केट प्राइस में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।
Avi Products India, जो डेंटर सप्लाई और आइसक्रीम जैसे खास सेगमेंट में काम करती है, के लिए डायरेक्ट लिस्टेड पियर (Listed Peers) ढूंढना मुश्किल है। Nazara Technologies Ltd और Indiamart Intermesh Ltd जैसी कंपनियां डिजिटल/ई-कॉमर्स स्पेस में हैं, लेकिन उनके बिजनेस मॉडल और स्केल काफी अलग हैं।
वित्तीय मोर्चे पर, Avi Products India का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू (Consolidated Revenue) फाइनेंशियल ईयर 2025 में लगभग ₹45 करोड़ था, जबकि नेट प्रॉफिट (Net Profit) लगभग ₹1.5 करोड़ दर्ज किया गया था।
निवेशकों को ऑफर की शुरुआत (13 मई, 2026) और समाप्ति (26 मई, 2026) की तारीखों पर नजर रखनी चाहिए। रेगुलेटरी मंजूरियों की स्थिति, ऑफर प्राइस या साइज में संभावित बदलाव, एक्सटेंशन और ऑफर की एक्सेप्टेंस रेशियो (Acceptance Ratio) पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
