DGGI का ₹149.73 करोड़ का GST डिमांड नोटिस
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स इंटेलिजेंस (DGGI), जयपुर ने ACME Solar Holdings Limited को एक शो-कॉज कम डिमांड नोटिस (SCN) भेजा है। इस नोटिस में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने सौर ऊर्जा उत्पादन प्रणालियों से संबंधित सप्लाई पर अप्रैल 2021 से मार्च 2025 की अवधि के दौरान लगभग ₹149.73 करोड़ का GST कम भुगतान किया है। कंपनी ने 29 मार्च 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को सूचित किया कि उन्हें 28 मार्च 2026 को DGGI से यह नोटिस प्राप्त हुआ है।
कंपनी का जवाब: हम लड़ेंगे!
ACME Solar Holdings Limited का कहना है कि वे इस नोटिस की गहनता से समीक्षा कर रहे हैं और इस मामले को पुरजोर तरीके से चुनौती देंगे। कंपनी को टैक्स अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। ACME Solar को उम्मीद है कि इस डिमांड नोटिस से तत्काल कोई वित्तीय या परिचालन (Operational) प्रभाव नहीं पड़ेगा। कंपनी अपने टैक्स और कानूनी सलाहकारों की मदद से एक औपचारिक जवाब तैयार करेगी और उचित कानूनी तथा रेगुलेटरी मंचों पर इस कथित GST डिमांड को चुनौती देगी।
कंपनी का बैकग्राउंड और टैक्स से जुड़ा अनुभव
भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में एक प्रमुख खिलाड़ी के तौर पर, ACME Solar के पास सोलर, विंड और हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स का एक बड़ा पोर्टफोलियो है। कंपनी का 'चेंज इन लॉ' (Change in Law) जैसी घटनाओं से निपटने का अनुभव रहा है, जिसमें GST दरों और सौर घटकों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) में वृद्धि के लिए मुआवजा (Compensation) हासिल करना शामिल है। उदाहरण के तौर पर, राजस्थान इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (RERC) से एक सहायक कंपनी ने ऐसे प्रभावों के कारण नवंबर 2025 में लगभग ₹47.40 करोड़ का मुआवजा सफलतापूर्वक प्राप्त किया था। मार्च 2026 तक, ACME Solar के 11 राज्यों में फैले व्यापक परिचालन के लिए 13 GST नंबर्स रजिस्टर्ड हैं।
क्या हैं संभावित वित्तीय और ऑपरेशनल जोखिम?
हालांकि ACME Solar इस डिमांड को चुनौती देने की योजना बना रही है, लेकिन मुख्य जोखिम यह है कि यदि DGGI का दावा सही साबित होता है, तो कंपनी पर एक बड़ा वित्तीय बोझ आ सकता है। इसमें ₹149.73 करोड़ की मूल राशि के साथ-साथ भारी ब्याज (Interest) और जुर्माना (Penalties) भी शामिल हो सकते हैं। एक लंबी कानूनी लड़ाई प्रबंधन के ध्यान और संसाधनों को भी बांट सकती है। शेयरहोल्डर्स (Shareholders) कंपनी की आगे की कानूनी रणनीति और किसी भी संभावित वित्तीय प्रावधान (Provisions) पर बारीकी से नजर रखेंगे, जिसका लाभप्रदता (Profitability) और बैलेंस शीट पर असर पड़ सकता है।
इंडस्ट्री का क्या है कहना?
ACME Solar, अडानी ग्रीन एनर्जी (Adani Green Energy), टाटा पावर सोलर (Tata Power Solar), रिन्यू एनर्जी ग्लोबल (ReNew Energy Global) और वारी एनर्जीज (Waaree Energies) जैसी बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा करती है। ये सभी कंपनियां भी जटिल टैक्स और रेगुलेटरी माहौल से गुजरती हैं। सोलर सेक्टर का समग्र विकास स्थिर रेगुलेटरी फ्रेमवर्क से गहराई से जुड़ा हुआ है, ऐसे में इस तरह के टैक्स विवाद इंडस्ट्री के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बने हुए हैं।
