वॉलंटरी डिलिस्टिंग (Voluntary Delisting) का मतलब है कि Tulive Developers अब स्टॉक एक्सचेंज पर पब्लिकली ट्रेडेड कंपनी नहीं रहेगी, जिससे इसके शेयरों की लिक्विडिटी (Liquidity) और ट्रेडिंग की सुविधा बदल जाएगी। स्वतंत्र निदेशकों की समिति ने इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है, और इसकी जानकारी 9 अप्रैल 2026 को फाइनेंशियल एक्सप्रेस, जनसत्ता और नवशक्ति जैसे प्रमुख अखबारों में प्रकाशित की गई है। इस पूरे डिलिस्टिंग ऑफर को Saffron Capital Advisors Private Limited मैनेज कर रही है, जिसे कंपनी की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।
इस ऑफर के तहत, प्रमोटर्स Altis Properties Private Limited और GKS Technology Park Private Limited, शेयरधारकों से उनके शेयर वापस खरीदने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए इंडिकेटिव प्राइस (Indicative Price) ₹750 प्रति शेयर तय किया गया है, जबकि फ्लोर प्राइस (Floor Price) ₹719.30 रखा गया है। शेयरधारकों को अपना हिस्सा बेचने का मौका 15 अप्रैल से 21 अप्रैल 2026 तक बिडिंग (Bidding) प्रक्रिया के दौरान मिलेगा। BSE (Bombay Stock Exchange) ने 2 अप्रैल 2026 को इस डिलिस्टिंग के लिए इन-प्रिंसिपल अप्रूवल (in-principle approval) भी दे दिया है, और यह प्रक्रिया SEBI (Delisting of Equity Shares) Regulations, 2021 के तहत चल रही है।
शेयरधारकों के लिए यह पब्लिक मार्केट से बाहर निकलने का एक मौका है, लेकिन यह निर्णय ऑफर प्राइस और उनकी अपनी वित्तीय योजनाओं पर निर्भर करेगा। यदि डिलिस्टिंग सफल होती है, तो कंपनी प्राइवेट हो जाएगी। हालांकि, जो शेयरधारक अपने शेयर नहीं बेचते, उन्हें भविष्य में लिक्विडिटी का जोखिम उठाना पड़ सकता है। कंपनी के लिए आगे SEBI की अंतिम मंजूरी और बिडिंग प्रक्रिया का सफल होना अहम होगा।
