Tulive Developers Delisting: निवेशकों को ₹750 में शेयर बेचने का मौका, अब BSE पर नहीं होंगे ट्रेड

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Tulive Developers Delisting: निवेशकों को ₹750 में शेयर बेचने का मौका, अब BSE पर नहीं होंगे ट्रेड
Overview

Tulive Developers Limited ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) से अपना वॉलंटरी डीलिस्टिंग प्रोसेस पूरा कर लिया है। रिवर्स बुक बिल्डिंग (RBB) प्रक्रिया **21 अप्रैल, 2026** को समाप्त हुई, जिसमें शेयर **₹750** प्रति शेयर की दर से वापस खरीदे गए। इसके बाद प्रमोटर की हिस्सेदारी बढ़कर **94.32%** हो गई है, और अब कंपनी के शेयर BSE पर ट्रेड नहीं करेंगे।

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डीलिस्टिंग प्रोसेस का हुआ समापन

Tulive Developers Limited का बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) से वॉलंटरी डीलिस्टिंग का प्रोसेस आज यानी 21 अप्रैल, 2026 को पूरा हो गया है। कंपनी ने रिवर्स बुक बिल्डिंग (RBB) प्रक्रिया के तहत पब्लिक शेयरहोल्डर्स से 4,79,058 इक्विटी शेयर ₹750 प्रति शेयर के एग्जिट प्राइस पर वापस खरीदे हैं। इस सफल बायबैक के बाद, प्रमोटर ग्रुप की कंपनी में हिस्सेदारी बढ़कर 94.32% हो गई है। अब Tulive Developers के शेयर BSE पर ट्रेड नहीं करेंगे और कंपनी एक प्राइवेट लिमिटेड एंटिटी के तौर पर काम करेगी। डीलिस्टिंग ऑफर 15 से 21 अप्रैल, 2026 तक चला, जिसमें शेयर का फ्लोर प्राइस ₹719.30 प्रति शेयर तय किया गया था।

निवेशकों पर क्या होगा असर?

इस डीलिस्टिंग के पूरा होने के साथ ही Tulive Developers Limited के इक्विटी शेयर BSE से हटा दिए जाएंगे। इसका मतलब है कि कंपनी पब्लिक मार्केट के सख्त नियमों और रिपोर्टिंग की बाध्यताओं से मुक्त हो जाएगी। जिन पब्लिक शेयरहोल्डर्स ने इस ऑफर में हिस्सा नहीं लिया, उनके शेयर अब किसी भी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड या ट्रेड नहीं होंगे, जिससे उनकी लिक्विडिटी पर असर पड़ेगा।

कंपनी की पृष्ठभूमि और डीलिस्टिंग का कारण

1962 में स्थापित Tulive Developers रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में सक्रिय है। कंपनी के प्रमोटर्स Altis Properties Private Limited और GKS Technology Park Private Limited ने डीलिस्टिंग की पहल की थी। जनवरी 2026 में, शेयरहोल्डर्स ने पोस्टल बैलट के जरिए 99.81% वोटों से इस वॉलंटरी डीलिस्टिंग प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। यह कदम कंपनी को SEBI के नियमों के तहत डीलिस्टिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाने की राह पर ले गया। कंपनी का लक्ष्य ओनरशिप को कंसॉलिडेट करना, ऑपरेशन्स को सुव्यवस्थित करना और पब्लिक प्रोफाइल बनाए रखने से जुड़े कंप्लायंस और लिस्टिंग कॉस्ट को कम करना है। ₹750 प्रति शेयर का एग्जिट प्राइस उन शेयरहोल्डर्स के लिए एक संभावित प्रीमियम था जो एग्जिट करना चाहते थे।

भविष्य में क्या देखना महत्वपूर्ण होगा?

डीलिस्टिंग पूरी होने के बाद, Tulive Developers अब BSE पर पब्लिकली ट्रेडेड कंपनी नहीं रहेगी। प्रमोटर्स Altis Properties Private Limited और GKS Technology Park Private Limited के पास अब संयुक्त रूप से 94.32% की बड़ी हिस्सेदारी है, जो कंपनी को पब्लिक मार्केट के दखल के बिना रणनीतिक लचीलापन प्रदान करती है। जिन शेयरहोल्डर्स ने अपने शेयर बेचे हैं, उन्हें ₹750 का एग्जिट प्राइस मिलेगा।

जोखिम जिन पर नजर रखनी होगी

Tulive Developers का रेगुलेटरी एंगेजमेंट का इतिहास रहा है। 2013 में SEBI ने मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नॉर्म्स को लेकर कंपनी की जांच की थी। इसके डायरेक्टर Atul Gupta को 2015 में इनसाइडर ट्रेडिंग डिस्क्लोजर के उल्लंघन के लिए पेनल्टी झेलनी पड़ी थी। वित्तीय मोर्चे पर, कंपनी ने हाल की अवधि में नेगेटिव रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) और रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) दर्ज किया है, जो प्रदर्शन संबंधी चुनौतियों का संकेत देता है। इसके अलावा, एक प्रमोटर एंटिटी G.K.S. Technology Park Pvt. Ltd. को 2021 में TNRERA से कॉमन एरिया स्पेस की गलत बिक्री के लिए ₹5 लाख का जुर्माना लगाया गया था।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.