Q4 में घाटा और रेवेन्यू में ज़ीरो!
Skyline Millars Ltd ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुई चौथी तिमाही के लिए ₹0.46 करोड़ का नेट लॉस बताया है। इसी के साथ, पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए नेट लॉस बढ़कर ₹1.06 करोड़ हो गया है।
चौथी तिमाही में, कंपनी की कुल आय (Total Income) पिछले साल की तुलना में 97.05% गिरकर ₹7.09 लाख रह गई। खास बात यह है कि ऑपरेशंस से रेवेन्यू लगभग शून्य था। इस तिमाही में कंपनी को ₹45.85 लाख का शुद्ध घाटा हुआ। पूरे साल की बात करें तो कुल आय 18.02% घटकर ₹220.24 लाख रही, जबकि नेट लॉस पिछले साल के ₹26.12 लाख से बढ़कर ₹106.38 लाख पर पहुंच गया।
कैश रिजर्व में बड़ी गिरावट, कामकाज पर असर
ऑपरेशंस से रेवेन्यू का लगभग पूरी तरह बंद हो जाना, कंपनी के मुख्य व्यवसाय में एक गंभीर ठहराव का संकेत देता है। इस स्थिति को और गंभीर बनाते हुए, कंपनी के कैश और कैश इक्विवेलेंट्स (Cash & Cash Equivalents) में 93% से ज़्यादा की भारी गिरावट आई है। यह ₹112.80 लाख से घटकर 31 मार्च, 2026 तक सिर्फ ₹7.07 लाख रह गया है। ये आंकड़े गंभीर लिक्विडिटी (Liquidity) दबाव को दर्शाते हैं, जो कंपनी की रोजमर्रा की परिचालन लागतों को पूरा करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।
घाटकोपर प्रोजेक्ट पर एक दशक से कानूनी अड़चन
कंपनी की सबसे बड़ी रियल एस्टेट परियोजना, जो घाटकोपर में है, वह 2011 से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चल रहे एक मामले के कारण रुकी हुई है। यह एक दशक से अधिक समय से चला आ रहा कानूनी गतिरोध, इस महत्वपूर्ण संपत्ति से किसी भी तरह के विकास या रेवेन्यू की संभावना को पूरी तरह से रोक रहा है, जो कंपनी के विकास और पुनरुद्धार के लिए एक लगातार चुनौती बना हुआ है।
लंबी अनिश्चितता और शेयरधारकों की चिंता
Skyline Millars का इतिहास एक सदी से भी पुराना है, जो पहले कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (Construction Equipment) से रियल एस्टेट डेवलपमेंट (Real Estate Development) में आई थी। हालांकि, कंपनी लंबे समय से घाटे में चल रही है, और ऑपरेटिंग लॉस (Operating Loss) फाइनेंशियल ईयर 1995-96 से ही जारी है। वर्तमान कानूनी लड़ाइयां इन ऐतिहासिक वित्तीय चुनौतियों को और बढ़ा रही हैं।
शेयरधारकों को कंपनी के संचालन में ठहराव और वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि कोई भी तत्काल रेवेन्यू स्रोत नहीं दिख रहा है। कंपनी का मूल्यांकन (Valuation) पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट मामले के अनिश्चित परिणाम पर निर्भर करता है। भविष्य में किसी भी रिकवरी (Recovery) के लिए इस कानूनी गतिरोध का समाधान होना जरूरी है, जिसके जल्द सुलझने के कोई आसार नज़र नहीं आ रहे हैं।
रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर में काम करने वाली Skyline Millars की यह स्थिति, जहां एक लंबे समय से चले आ रहे कानूनी गतिरोध ने परियोजनाओं को रोक रखा है, Supertech और Piyush Group जैसे बड़े डेवलपर्स द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों के समान है। हालांकि, Skyline Millars का छोटा आकार, सीमित कैश रिजर्व और रुके हुए ऑपरेशंस इसे विशेष रूप से गंभीर स्थिति में डालते हैं।
आगे क्या देखना होगा?
भविष्य में, घाटकोपर डेवलपमेंट से संबंधित सुप्रीम कोर्ट मामले के किसी भी अपडेट पर नज़र रखनी होगी। कंपनी द्वारा अपने बेहद कम कैश रिजर्व का प्रबंधन करने की रणनीति और परिचालन को बनाए रखने की उसकी क्षमता महत्वपूर्ण होगी। वित्तीय मेट्रिक्स, विशेष रूप से रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) में किसी भी और गिरावट पर भी बारीकी से नजर रखी जाएगी।
