कैपिटल रेजिंग का मकसद
कंपनी इस Rights Issue के ज़रिए ₹97 करोड़ की पूंजी जुटाएगी। यह पैसा मुख्य रूप से रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को फंड करने, नई जमीनें खरीदने या मौजूदा प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इससे कंपनी की ग्रोथ स्ट्रेटेजी को मजबूती मिलेगी और असेट बेस बढ़ेगा।
रेगुलेटरी मंज़ूरी और कमेटी
इस Rights Issue को स्टॉक एक्सचेंज और अन्य रेगुलेटरी बॉडीज़ से शुरुआती मंज़ूरी (in-principle approval) मिलनी बाकी है। एक खास बनाई गई कमेटी जल्द ही इश्यू प्राइस (Issue Price) और रेशियो (Ratio) जैसे ज़रूरी terms तय करेगी।
शेयरधारकों पर असर
मौजूदा शेयरधारकों को नए Shares खरीदने का मौका मिलेगा, जो शायद डिस्काउंट पर दिए जाएं। हालांकि, जो शेयरधारक इसमें हिस्सा नहीं लेंगे, उनके मालिकाना हक (ownership percentage) में कमी आ सकती है, जिसे इक्विटी डाइल्यूशन (Equity Dilution) कहते हैं।
कंपनी का इतिहास और पिछला अनुभव
Shraddha Prime Projects, जिसे पहले Towa Sokki Limited के नाम से जाना जाता था, मुंबई की एक रियल एस्टेट डेवलपर है। यह रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स, टाउनशिप्स और स्लम रिहैबिलिटेशन पर फोकस करती है। कंपनी ने पहले भी पूंजी जुटाई है; जुलाई 2023 में लगभग ₹49.88 करोड़ का Rights Issue पूरा किया था। इससे पहले मार्च 2023 में भी बोर्ड ने इसी तरह के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, और नवंबर 2025 में ₹60 करोड़ के Non-Convertible Debentures (NCDs) जुटाने का भी अप्रूवल मिला था।
मुख्य जोखिम (Key Risks)
इस कदम से जुड़े कुछ अहम जोखिम भी हैं। सबसे बड़ा जोखिम इक्विटी डाइल्यूशन का है, खासकर उन शेयरधारकों के लिए जो Rights Issue में भाग नहीं लेते। कंपनी पर कर्ज का बोझ भी काफी ज्यादा है, जिसका डेट-टू-इक्विटी रेशियो 223.5% है और यह बढ़ रहा है। वर्किंग कैपिटल डेज़ (305 से बढ़कर 587 दिन) भी काफी बढ़ गए हैं। प्रमोटर, सुधीर बालू मेहता, ने अपने 70 लाख शेयरों का एक बड़ा हिस्सा HDFC Bank के पास गिरवी रखा है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। कंपनी को पहले मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना भी भुगतना पड़ा था।
वित्तीय नतीजे (Financial Results)
फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) 31 मार्च 2025 को समाप्त हुए, Shraddha Prime Projects ने ₹160.17 करोड़ का टोटल इनकम और ₹24.92 करोड़ का नेट प्रॉफिट (Profit After Tax) दर्ज किया।
आगे क्या देखना होगा
निवेशकों को आगे BSE और अन्य रेगुलेटरी बॉडीज़ से मंज़ूरी का इंतजार करना चाहिए। नई कमेटी द्वारा तय किए जाने वाले Rights Issue के terms, फंड के इस्तेमाल की विस्तृत योजना, और प्रमोटर शेयरहोल्डिंग व कर्ज प्रबंधन से जुड़ी खबरों पर नज़र रखनी होगी।
