कंपनी ने कैसे जुटाए ₹58 करोड़?
Shraddha Prime Projects Ltd ने 5,800 सिक्योर्ड, रिडीमेबल, अनरेटेड और अनलिस्टेड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी कर यह राशि जुटाई है। हर डिबेंचर का फेस वैल्यू ₹1,00,000 है।
इन पैसों का होगा क्या?
कंपनी ने साफ किया है कि इस रकम का इस्तेमाल मुख्य रूप से रियल एस्टेट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने और उन्हें फंड करने के लिए किया जाएगा। इससे कंपनी की लिक्विडिटी (तरलता) बढ़ेगी और प्रोजेक्ट्स की रफ्तार तेज हो सकती है।
'अनरेटेड' NCDs में जोखिम ही जोखिम
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये डिबेंचर्स 'अनरेटेड' हैं, यानी इन्हें किसी भी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी जैसे CRISIL या ICRA ने प्रमाणित नहीं किया है। इसका सीधा मतलब है कि इन डिबेंचर्स को लेकर बाजार का कोई स्वतंत्र मूल्यांकन मौजूद नहीं है। ऐसे में, निवेशक इन बॉन्ड्स में ज्यादा जोखिम महसूस कर सकते हैं।
सेबी नियम और लिस्टिंग का अभाव
कंपनी ने यह भी कन्फर्म किया है कि SEBI Regulation 57(5) इस इश्यू पर लागू नहीं होता, क्योंकि ये डिबेंचर्स किसी भी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड नहीं हैं। कंपनी की ओर से यह जानकारी 31 मार्च, 2026 तक के लिए 21 अप्रैल, 2026 को दी गई थी।
निवेशकों को क्या देखना होगा?
अनलिस्टेड होने की वजह से, इन NCDs को मैच्योरिटी से पहले बेचना या ट्रेड करना निवेशकों के लिए मुश्किल हो सकता है। बिना रेटिंग के, कंपनी की वित्तीय सेहत का आकलन करना भी निवेशकों के लिए एक बड़ी चुनौती है। हालांकि ये सिक्योर्ड हैं, फिर भी रीपेमेंट डिफॉल्ट (भुगतान में चूक) का जोखिम बना रहता है।
कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड
Shraddha Prime Projects Ltd रेजिडेंशियल और कमर्शियल रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स डेवलप करती है। इससे पहले फरवरी 2024 में, कंपनी ने अपने रियल एस्टेट वेंचर्स के लिए एक्सिस बैंक से ₹20 करोड़ तक की टर्म लोन फैसिलिटी भी हासिल की थी।
