### इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया का अंत, लेकिन ऑडिटर की बड़ी चेतावनी
Rajeswari Infrastructure Limited के लिए 13 जनवरी, 2026 का दिन अहम रहा, जब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने कंपनी की कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) को आधिकारिक तौर पर समाप्त करने की मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ ही, कंपनी की कमान अब मिस्टर संजय मेहरा की अध्यक्षता वाली नई निगरानी समिति (Monitoring Committee) को सौंप दी गई है।
Q1 FY26 के नतीजे और चिंताजनक ऑडिटर रिपोर्ट
एक तरफ जहां कंपनी इन्सॉल्वेंसी से निकली है, वहीं दूसरी तरफ 30 जून, 2025 को समाप्त हुई पहली तिमाही (Q1 FY26) के अन-ऑडिटेड नतीजे कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। Rajeswari Infrastructure ने इस तिमाही में सिर्फ ₹0.03 लाख की मामूली आय दर्ज की और ₹3.02 लाख का नेट लॉस (Net Loss) दिखाया। पिछले साल की समान तिमाही (Q1 FY25) के मुकाबले यह स्थिति लगभग वैसी ही है, जब ₹0.05 लाख की आय पर ₹3.04 लाख का घाटा हुआ था।
इन नतीजों से ज़्यादा चिंताजनक बात कंपनी के ऑडिटर का डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन (Disclaimer of Opinion) है। ऑडिटर ने वित्तीय नतीजों पर संदेह जताया है क्योंकि उन्हें पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं और संभावित मटेरियल मिसस्टेटमेंट (Material Misstatement) का भी अंदेशा है।
ऑडिटर की मुख्य चिंताएं
ऑडिटर की चिंताओं का दायरा काफी बड़ा है। उन्होंने CIRP के तहत स्वीकार किए गए ₹35.34 करोड़ के बकाए से संबंधित प्रोविज़न (Provision) और नेट लॉस में ₹22.65 करोड़ से ज़्यादा के संभावित मटेरियल मिसस्टेटमेंट का ज़िक्र किया है। ऑडिटर को प्रबंधन के अनुमानों, एसेट वैल्यूएशन और इम्पेयरमेंट आकलन के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले। साथ ही, टेंजिबल और इनटेंजिबल एसेट्स के अस्तित्व, पूर्णता और वैल्यूएशन को लेकर भी सबूत अधूरे थे। इसके अलावा, इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत TDS प्रावधानों का अनुपालन न होना और लोन व एडवांसेज (Loans and Advances) के बैलेंसेज़ की वसूली की संभावना पर भी सवाल उठाए गए हैं।
कंपनी का बैकग्राउंड और बाजार की स्थिति
1993 में स्थापित Rajeswari Infrastructure सिविल कंस्ट्रक्शन, प्रिंटिंग और सर्विस अपार्टमेंट्स जैसे क्षेत्रों में काम करती है। कंपनी 10 मई, 2023 को CIRP में दाखिल हुई थी। FY22 जैसे पिछले वित्तीय वर्षों में भी कंपनी ने रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी में बड़ी गिरावट और नेट वर्थ में भारी कमी देखी थी।
इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में Rajeswari Infrastructure का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (Market Capitalisation) लगभग ₹2-2.2 करोड़ है, जो Larsen & Toubro, IRB Infrastructure Developers और Brigade Enterprises जैसे बड़े खिलाड़ियों की तुलना में काफी कम है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
CIRP के ख़त्म होने के बाद, अब निगरानी समिति पर कंपनी के संचालन की ज़िम्मेदारी है। हालांकि, ऑडिटर की गंभीर टिप्पणियों के चलते कंपनी पर कड़ी नज़र रखी जाएगी। निवेशकों को Rajeswari Infrastructure के भविष्य के डिस्क्लोज़र (Disclosures) पर बारीकी से नज़र रखनी होगी। खासकर, ऑडिटर की चिंताओं पर कंपनी कैसे प्रतिक्रिया देती है, इन निष्कर्षों का क्या असर होता है, और नई निगरानी समिति की रणनीतियाँ क्या रहती हैं, यह देखना अहम होगा।
