NCLT का फरमान: कंपनी दिवालियापन की राह पर
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के दिल्ली कोर्ट II ने Parsvnath Developers Ltd को कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में भेजने का आदेश दिया है। इंसॉल्वेंसी की शुरुआत 30 अप्रैल, 2026 से मानी जाएगी। NCLT ने एक अंतरिम समाधान पेशेवर (IRP) को नियुक्त किया है, जो अब कंपनी के कामकाज को संभालेगा।
क्रेडिटर्स के लिए क्या है खास?
कंपनी के लेनदारों (Creditors) को 27 मई, 2026 तक NCLT के पास अपने दावे पेश करने होंगे। NCLT ने इस पूरी प्रक्रिया को 27 अक्टूबर, 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है, जो कि शुरुआत से करीब 180 दिनों का समय है।
CIRP का मतलब और कंपनी की हालत
CIRP में जाने का मतलब है कि अब Parsvnath Developers ऋणों के समाधान और कंपनी को फिर से खड़ा करने के लिए एक औपचारिक कानूनी प्रक्रिया के तहत आ गई है। IRP का मुख्य काम कंपनी की संपत्ति को सुरक्षित रखना और लेनदारों या अन्य पक्षों से एक व्यवहार्य समाधान योजना (Resolution Plan) खोजना है।
कंपनी पिछले कई सालों से भारी वित्तीय संकट (Financial Stress) और ऋण चुकाने में दिक्कतें झेल रही थी। यह कंपनी के लिए कोई नया नहीं है, क्योंकि लेंडर्स की ओर से कई कानूनी नोटिस और NCLT में केस पहले से चल रहे थे।
वित्तीय तस्वीर (Financial Picture)
कंपनी के FY23-24 के आंकड़ों के अनुसार, डेट टू इक्विटी रेश्यो (Debt to Equity Ratio) 2.90 रहा। वहीं, Q4 FY24 में, कंपनी पर ₹5,200 करोड़ की कंटींजेंट लायबिलिटीज़ (Contingent Liabilities) थीं, जो भविष्य में देनदारी बन सकती हैं।
इंडस्ट्री के बाकी दिग्गज
Parsvnath Developers की तुलना में DLF Ltd, Godrej Properties Ltd, Oberoi Realty Ltd, और Sobha Ltd जैसे बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स काफी मजबूत वित्तीय स्थिति में हैं। उनके पास विविध प्रोजेक्ट्स और बाजार में अच्छी पकड़ है, जो Parsvnath Developers की मौजूदा स्थिति से बिल्कुल अलग है।
आगे क्या?
अब सभी की निगाहें 27 मई, 2026 की डेडलाइन पर हैं, जब क्रेडिटर्स अपने दावे पेश करेंगे। इसके बाद IRP कंपनी की वित्तीय सेहत का मूल्यांकन करेगा और समाधान योजनाएं तलाशेगा। NCLT का फैसला और 27 अक्टूबर, 2026 तक की समय-सीमा महत्वपूर्ण रहेगी।
