रियल एस्टेट डेवलपर Omaxe Limited ने अपने आगामी प्रोजेक्ट्स को वित्तीय मजबूती देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने ₹31.30 करोड़ के 313 सीनियर सिक्योर्ड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए आवंटित किए हैं। ये NCDs कंपनी की प्रोजेक्ट लैंड, लीजहोल्ड राइट्स, बैंक अकाउंट्स और मिलने वाले भुगतानों (receivables) द्वारा सुरक्षित हैं, जो इन डिबेंचर्स पर कर्जदारों को सुरक्षा का एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
इन डिबेंचर्स की मैच्योरिटी 54 महीनों तक हो सकती है, जो 16 जुलाई, 2025 से शुरू होगी। ये निवेशकों को 12% का कमिटेड इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न (IRR) देने का वादा करते हैं, जिसमें अतिरिक्त कमाई की भी संभावना है।
यह फंड जुटाना Omaxe की ₹199.40 करोड़ की व्यापक फंड जुटाने की योजना का हिस्सा है। यह कदम कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत करेगा और जारी प्रोजेक्ट्स के लिए आवश्यक पूंजी प्रदान करेगा, खासकर तब जब हाल की रिपोर्ट्स में कंपनी को नेट लॉस और नेगेटिव शेयरहोल्डर इक्विटी का सामना करना पड़ा है।
Omaxe, जो 1987 से रियल एस्टेट के क्षेत्र में सक्रिय है, पहले भी अपने प्रोजेक्ट्स के लिए NCDs का इस्तेमाल करती रही है। कंपनी ने ₹199.40 करोड़ के NCD इश्यू की मंजूरी दी थी। हाल ही में, एक सहायक कंपनी ने भी बिजनेस ग्रोथ के लिए ₹431 करोड़ NCDs से जुटाए थे। कंपनी ने समान कैपिटल (Samman Capital) को ₹7 अरब से अधिक का कर्ज भी चुकाया है, हालांकि कंपनी की वित्तीय सेहत पर चिंताएं बनी हुई हैं।
इस नई फंडिंग से Omaxe की प्रोजेक्ट पाइपलाइन के लिए लिक्विडिटी बढ़ेगी। हालांकि, NCDs के रीपेमेंट का दारोमदार सीधे प्रोजेक्ट के कैश फ्लो पर निर्भर करेगा। किसी भी ब्याज या मूलधन के भुगतान में 3 महीने से अधिक की देरी पर 3% IRR का अतिरिक्त जुर्माना लग सकता है।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि SEBI ने पहले Omaxe और उसके प्रमुख अधिकारियों को वित्तीय वर्ष 2018-2021 के दौरान गलतबयानी के चलते 2 साल के लिए सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंधित किया था। Omaxe ने इस आदेश को चुनौती देने की बात कही थी। रियल एस्टेट सेक्टर की अन्य बड़ी कंपनियां जैसे DLF Ltd, Lodha Developers, और Godrej Properties भी अक्सर डेट मार्केट्स का इस्तेमाल करती हैं, जिसमें Lodha ने ₹350 करोड़ और Godrej Properties ने ₹1,275 करोड़ NCDs के जरिए जुटाए हैं।
निवेशकों की निगाहें Omaxe की प्रोजेक्ट्स के एग्जीक्यूशन, टाइमलाइन और कैश फ्लो जनरेशन पर टिकी रहेंगी। साथ ही, कंपनी की लाभप्रदता की ओर बढ़ने की राह और नेगेटिव शेयरहोल्डर इक्विटी को सुलझाने के प्रयासों पर भी नजर रखी जाएगी। PUDA के साथ चल रहे मध्यस्थता मामले (arbitration case) के नतीजे भी अहम होंगे।
