रियल एस्टेट में उतरने का प्लान
Madhav Marbles and Granites Limited के बोर्ड ने अपनी सब्सिडियरी Madhav Natural Stone Surfaces Private Limited में 18.01% की अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी दे दी है। इस अधिग्रहण के बाद, Madhav Marbles की सब्सिडियरी में कुल हिस्सेदारी बढ़कर 100% हो जाएगी, जिससे यह एक पूरी तरह से Wholly Owned Subsidiary (WOS) बन जाएगी। कंपनी इस WOS का इस्तेमाल रियल एस्टेट सेक्टर में अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए करना चाहती है। सब्सिडियरी के पास मौजूद लैंड एसेट्स (land assets) का इस्तेमाल इस नए वेंचर (venture) में किया जाएगा। WOS बनने से Madhav Marbles को सब्सिडियरी की स्ट्रेटेजिक दिशा और फाइनेंसियल ऑपरेशन्स (financial operations) पर पूरा कंट्रोल मिल जाएगा।
सब्सिडियरी की पिछड़ी हालत और रिस्क
ऐतिहासिक रूप से, Madhav Marbles अपने मार्बल और ग्रेनाइट बिजनेस के साथ-साथ एक रियलिटी डिवीजन (Realty Division) भी चलाता रहा है। हालांकि, जिस सब्सिडियरी Madhav Natural Stone Surfaces Private Limited के जरिए रियल एस्टेट में कदम रखा जा रहा है, वह पिछले तीन सालों से NIL टर्नओवर दर्ज कर रही है। ऑडिटर (auditors) ने 31 मार्च 2025 तक सब्सिडियरी की नेट वर्थ (net worth) के पूरी तरह से खत्म हो जाने की बात कही है, जो संभावित इंपेयरमेंट (impairment) का संकेत है, हालांकि इसके लिए कोई प्रोविजन (provision) नहीं किया गया है। Madhav Marbles खुद भी SEBI (LODR) रेगुलेशन्स के उल्लंघन के लिए जुर्माने का सामना कर चुका है, हालांकि कंपनी ने इसके खिलाफ अपील दायर की है।
आगे क्या देखना होगा?
इस कदम में सबसे बड़ा रिस्क सब्सिडियरी की खराब फाइनेंशियल हेल्थ (financial health) का है, जिसका टर्नओवर जीरो है और नेट वर्थ खत्म हो चुकी है। ऑडिटर की चिंताएं भी एक बड़ा रेड फ्लैग (red flag) हैं। इसके अलावा, रेगुलेटरी अनुपालन (regulatory compliance) और एक इनएक्टिव सब्सिडियरी के साथ कॉम्पिटिटिव रियल एस्टेट सेक्टर में एंट्री करना भी बड़ी चुनौतियाँ पेश करेगा। अब निवेशकों को अधिग्रहण की फाइनल एग्रीमेंट्स (definitive agreements) पर प्रगति, जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल (regulatory approvals) मिलने की स्थिति, और सब्सिडियरी के नए रियल एस्टेट रोल में परफॉरमेंस पर नजर रखनी होगी।