शेयर होल्डर्स ने बढ़ाई कंपनी की ताकत:
Last Mile Enterprises Limited को अपने शेयरहोल्डर्स से दो अहम फैसलों पर हरी झंडी मिल गई है। कंपनी की बोरिंग लिमिट (borrowing limit) में बड़ी बढ़ोतरी और एम्प्लॉई हाउसिंग-लोन स्कीम 2026 (Employee Housing-Loan Scheme 2026) को पोस्टल बैलेट और ई-वोटिंग के जरिए 25 मार्च 2026 को मंजूरी दी गई। यह कदम कंपनी को भविष्य में बिज़नेस एक्टिविटीज और ग्रोथ के लिए बड़ा फंड जुटाने में मदद करेगा, वहीं हाउसिंग लोन स्कीम से कर्मचारियों के कल्याण और उन्हें कंपनी से जोड़े रखने में सहायता मिलेगी।
कंपनी की बदलती फाइनेंशियल तस्वीर:
अहमदाबाद की यह कंपनी रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में काम करती है। हाल ही में कंपनी ने ₹280.32 करोड़ का एक प्रेफरेंशियल इश्यू (preferential issue) पूरा किया था, हालांकि वारंट कन्वर्जन (warrant conversion) से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण इसके इम्प्लीमेंटेशन में देरी हुई। कंपनी के प्रमोटर्स की हिस्सेदारी में भी बड़ी गिरावट आई है, जो मार्च 2024 में 47% से ज्यादा थी, वह 2025 के अंत तक घटकर लगभग 25% रह गई। इसका एक कारण वारंट के बदले शेयर अलॉटमेंट भी है। वहीं, एक निवेशक समूह, जिसमें मैनेजमेंट के मुख्य लोग भी शामिल हैं, ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते हुए मार्च 2026 में 25% का आंकड़ा पार कर लिया है। कंपनी के शेयर में भी इन चुनौतियों का असर दिखा है, जहां 2026 की शुरुआत में बिक्री और मुनाफे में गिरावट के चलते इसने कई बार 52-हफ्ते के निचले स्तर (52-week lows) को छुआ।
सामने हैं बड़े चैलेंज:
Last Mile Enterprises को कई फाइनेंशियल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे कि घटती बिक्री, मुनाफे में कमी और बढ़ता नेट डेट (net debt)। शेयर की भारी गिरावट और लगातार 52-हफ्ते के निचले स्तरों पर बने रहना बाजार की मंदी की ओर इशारा करता है। पिछली फंडरेज़िंग में आई दिक्कतें, जैसे प्रेफरेंशियल इश्यू से मिली राशि का उपयोग करने में देरी, ऑपरेशनल मुश्किलों को दर्शाती है। ऐसे में, नई बोरिंग क्षमता का समझदारी से इस्तेमाल करना कंपनी के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा। हालांकि रियल एस्टेट सेक्टर सरकारी पहलों जैसे SWAMIH फंड से लाभान्वित हो रहा है, Last Mile का हालिया प्रदर्शन बताता है कि यह कठिन मार्केट सेगमेंट में काम कर रही है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशक अब कंपनी की ओर से वोटिंग नतीजों की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करेंगे। इसमें बढ़ाई गई बोरिंग लिमिट की सटीक राशि और एम्प्लॉई हाउसिंग-लोन स्कीम 2026 का स्ट्रक्चर जैसी अहम जानकारी शामिल होगी। मैनेजमेंट की नई बोरिंग क्षमता का इस्तेमाल करने की स्ट्रेटेजी, कंपनी की मौजूदा फाइनेंशियल सिचुएशन को देखते हुए, और हाउसिंग लोन स्कीम के लागू होने व कर्मचारियों द्वारा इसके उपयोग की जानकारी, निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत होंगे।
