L&T Realty का Gurugram में बड़ा प्लान: 20 एकड़ जमीन पर होगा मेगा प्रोजेक्ट!
Larsen & Toubro Realty Properties Ltd (LTRPL) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपनी पूरी तरह से सब्सिडियरी Delhi-based International Green Scapes Ltd (IGSL) में 100% हिस्सेदारी खरीद ली है। इस डील के साथ ही LTRPL को Gurugram में मौजूद 20 एकड़ के लैंड पार्सल का एक्सेस मिल गया है। यह NCR माइक्रो-मार्केट में कंपनी की पहली बड़ी जमीन की खरीद है, जो 3.6 मिलियन वर्ग फुट के बड़े डेवलपमेंट की क्षमता रखती है। यह अधिग्रहण L&T के रियल एस्टेट बिज़नेस को एक सिंगल एंटिटी में कंसॉलिडेट करने की स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जिसके लिए कंपनी को रेगुलेटरी अप्रूवल का इंतजार है।
NCR में L&T Realty की मजबूत पकड़
यह खरीद L&T Realty के डेवलपमेंट पाइपलाइन को काफी मजबूत करती है। हाई-ग्रोथ वाले NCR रीजन में एक अहम संपत्ति जुड़ने से कंपनी की इस डायनामिक रियल एस्टेट मार्केट में मौजूदगी और मजबूत होगी। अपने रियल एस्टेट ऑपरेशंस को कंसॉलिडेट करके L&T एक ज़्यादा फुर्तीली, केंद्रित और फाइनेंशियली मजबूत कंपनी बनाना चाहता है, जो मार्केट के अवसरों का बेहतर लाभ उठा सके।
रियल एस्टेट कारोबार को एक करने की L&T की योजना
Larsen & Toubro अपने विभिन्न रियल एस्टेट ऑपरेशंस को LTRPL के तहत कंसॉलिडेट करने की प्रक्रिया में है। कंपनी बोर्ड ने दिसंबर 2025 में इस इनिशिएटिव को मंजूरी दी थी, जिसमें L&T के रियल एस्टेट बिज़नेस अंडरटेकिंग को एक स्लंप सेल के जरिए ट्रांसफर किया जाएगा। यह सब रेगुलेटरी क्लीयरेंस मिलने पर निर्भर करेगा। इस कंसॉलिडेशन का मकसद एक यूनिफाइड, फ्यूचर-रेडी एंटिटी बनाना है, जिससे ब्रांड प्रेजेंस बढ़े और डेट व इक्विटी फाइनेंसिंग हासिल करने में आसानी हो। 2025 के अंत तक, L&T Realty के पास 65 मिलियन वर्ग फुट से ज़्यादा का डेवलपमेंट पाइपलाइन था और कंपनी नई जमीन की तलाश में थी।
मार्केट में कॉम्पिटिशन
L&T Realty की इस अधिग्रहण से वह NCR माइक्रो-मार्केट में सीधे तौर पर दूसरे बड़े प्लेयर्स के साथ कॉम्पिटिशन में आ गई है। उदाहरण के लिए, DLF ने Gurugram में ही 29 एकड़ की जमीन ₹825 करोड़ में खरीदी है। वहीं, Macrotech Developers (Lodha) भी दिल्ली-NCR में जमीन की तलाश में है, जबकि Godrej Properties और Oberoi Realty की भी इस क्षेत्र में अच्छी खासी मौजूदगी है।
आगे क्या?
रेगुलेटरी अप्रूवल मिलना L&T की रियल एस्टेट बिज़नेस कंसॉलिडेशन योजना के लिए सबसे अहम होगा। इन अप्रूवल में किसी भी तरह की देरी इस पूरी प्रक्रिया की स्पीड को धीमा कर सकती है।
