यह कदम SEBI के Prohibition of Insider Trading Regulations के तहत उठाया गया है। इस 'ब्लैकआउट पीरियड' के दौरान, कंपनी के डेजिग्नेटेड इम्प्लॉइज (designated employees) और उनके करीबी रिश्तेदार कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री नहीं कर सकेंगे। यह पाबंदी तब तक लागू रहेगी जब तक कि कंपनी 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुई तिमाही और पूरे फाइनेंशियल ईयर के नतीजों की घोषणा नहीं कर देती। नतीजों के ऐलान के 48 घंटे बाद ही यह विंडो दोबारा खुलेगी।
कंपनी जल्द ही बोर्ड मीटिंग की तारीख की घोषणा करेगी, जहाँ इन नतीजों को मंजूरी दी जाएगी।
कंपनी का बैकग्राउंड
Lancor Holdings, जो 1985 में स्थापित हुई थी, रियल एस्टेट सेक्टर में काम करती है और BSE व NSE दोनों पर लिस्टेड है।
पिछला रेगुलेटरी एक्शन
यह पहली बार नहीं है जब कंपनी या उसके प्रमोटर्स किसी रेगुलेटरी कार्रवाई में फंसे हों। अक्टूबर 2017 में, SEBI ने कंपनी के चार प्रमोटर्स - R V Shekar, Shyamala Shekar, Sangeetha Shekar, और Swetha Shekar - पर ₹20 लाख का जुर्माना लगाया था। यह जुर्माना बल्क डील के जरिए शेयर खरीदने के बाद जरूरी पब्लिक अनाउंसमेंट न करने के कारण लगाया गया था, जो SAST रेगुलेशन्स का उल्लंघन था।
इंडस्ट्री में आम चलन
रियल एस्टेट सेक्टर और भारत की अन्य लिस्टेड कंपनियों में यह 'ट्रेडिंग विंडो क्लोजर' एक आम और स्टैंडर्ड प्रैक्टिस है। DLF Limited, Oberoi Realty Limited, Sobha Limited, और Godrej Properties Limited जैसी कंपनियां भी अपने फाइनेंशियल रिजल्ट्स जारी करने से पहले ऐसे ही क्लोजर लागू करती हैं।
