Knowledge Realty Trust (KRT) अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। कंपनी की बॉरोइंग कमेटी (Borrowing Committee) 27 अप्रैल, 2026 को एक अहम मीटिंग में फंड जुटाने के विभिन्न रास्तों पर विचार-विमर्श करेगी।
इस मीटिंग का मुख्य एजेंडा लिस्टेड, रेटेड और रिडीमेबल नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) और कमर्शियल पेपर्स (CPs) जारी करके कैपिटल रेज़ (Capital Raise) करना है। कमेटी के पास रेगुलेटरी नियमों और निवेशकों के मानदंडों को पूरा करने की शर्त पर इन डेट इंस्ट्रूमेंट्स (debt instruments) के इस्तेमाल को मंजूरी देने का अधिकार होगा।
डेट के जरिए फंड जुटाना KRT को ग्रोथ (growth) के लिए जरूरी पूंजी प्रदान कर सकता है, मौजूदा देनदारियों (existing obligations) को रीफाइनेंस (refinance) करने में मदद कर सकता है, या फिर ऑपरेशनल खर्चों (operational expenses) को कवर करने में सहायक हो सकता है। यह कदम REIT के कैपिटल स्ट्रक्चर (capital structure) को मैनेज करने और वित्तीय लचीलापन (financial flexibility) बनाए रखने की कंपनी की सक्रिय रणनीति को दर्शाता है।
भारत के सबसे बड़े ऑफिस REIT के तौर पर, KRT का पोर्टफोलियो 31 मार्च, 2025 तक 6 सिटी-सेंटर ऑफिस और 23 बिजनेस पार्क्स तक फैला हुआ था। कंपनी ने अगस्त 2025 में ₹4,800 करोड़ का IPO पूरा किया था, जिसका एक हिस्सा डेट चुकाने के लिए भी था। इससे पहले भी KRT ने निवेशकों से ₹1,400 करोड़ जुटाए थे। 9 फरवरी, 2026 को पिछली बॉरोइंग कमेटी की मीटिंग हुई थी।
जुलाई 2025 तक, Knowledge Realty Trust पर कुल कर्ज (total debt) ₹20,827.67 करोड़ था, जबकि FY25 के अंत तक कंटीजेंट लायबिलिटीज़ (contingent liabilities) ₹546.97 करोड़ थीं।
SEBI के रेगुलेशन के तहत, REITs अपनी एसेट वैल्यू (asset value) का 49% तक कर्ज ले सकती हैं, बशर्ते 25% से ऊपर के कर्ज के लिए यूनिट होल्डर की मंजूरी लेनी पड़े। इस फंड रेज़िंग से KRT का डेट-टू-इक्विटी रेशियो (debt-to-equity ratio) प्रभावित होगा, लेकिन यह रेगुलेटरी लिमिट्स के दायरे में रहेगा।
मार्केट में Embassy Office Parks REIT और Mindspace Business Parks REIT जैसे अन्य प्रमुख REITs भी सक्रिय हैं, जिनकी अपनी बाजार पोजीशनिंग है।
निवेशक 27 अप्रैल, 2026 की बॉरोइंग कमेटी की मीटिंग के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह देखना अहम होगा कि कंपनी कितना फंड जुटाएगी और NCDs या CPs की शर्तें क्या होंगी।
