रिकॉर्ड बिक्री और महत्वाकांक्षी लक्ष्य
Keystone Realtors ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर में ₹4,022 करोड़ की अब तक की सबसे ज़्यादा सालाना प्री-सेल्स हासिल की है। यह कंपनी के आंतरिक लक्ष्यों से काफी ऊपर है। FY26 की चौथी तिमाही में ही ₹1,346 करोड़ की बुकिंग हुई, जो इस रिकॉर्ड को बनाने में अहम साबित हुई।
FY27 के लिए कंपनी का लक्ष्य ₹5,000 करोड़ की प्री-सेल्स का है, जो भविष्य में मजबूत ग्रोथ की ओर इशारा करता है।
मुख्य वित्तीय आंकड़े और परफॉर्मेंस
FY26 के दौरान, डेवलपर ने ₹9,813 करोड़ के ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू (GDV) वाले सात प्रोजेक्ट लॉन्च किए, जो गाइडेंस से 40% ज़्यादा थे। बिजनेस डेवलपमेंट के मोर्चे पर भी कंपनी ने ₹10,400 करोड़ के पांच प्रोजेक्ट्स जोड़े, जो गाइडेंस से 70% ज़्यादा थे।
कंपनी नेट कैश पॉजिटिव स्थिति में है और उसका ग्रॉस डेट-टू-इक्विटी रेशियो 0.26:1 बना हुआ है। एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव के तहत, कंपनी अब हाई-मार्जिन वाले प्रीमियम और उभरते प्रीमियम सेगमेंट पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित कर रही है, जो उसके प्रोजेक्ट पाइपलाइन का 94% हिस्सा बन चुके हैं।
Revenue और मार्जिन की ज़्यादा स्पष्ट तस्वीर पेश करने के लिए, Keystone Realtors 'परसेंटेज ऑफ कंप्लीशन मेथड' (POCM) को अपना रही है। इसके साथ ही, ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बढ़ाने के लिए सिंगापुर की Robin Village के साथ मिलकर एक इन-हाउस प्रीकास्ट प्लांट भी विकसित किया जा रहा है।
रणनीतिक बदलाव और भविष्य का असर
यह परफॉर्मेंस Keystone Realtors के एग्जीक्यूशन और रणनीतिक दिशा को दर्शाता है। कम मार्जिन वाले पुराने प्रोजेक्ट्स से हटकर हाई-मार्जिन वाले प्रीमियम और रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स की ओर बढ़ना भविष्य की लाभप्रदता के लिए महत्वपूर्ण है। POCM अपनाने से FY28 से वित्तीय प्रदर्शन का ज़्यादा डायनामिक व्यू मिलने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए आउटलुक
- FY28 से POCM में ट्रांज़िशन होने पर शेयरधारकों को बेहतर रेवेन्यू रिकग्निशन और मार्जिन विजिबिलिटी की उम्मीद है।
- हाई-मार्जिन (35% ग्रॉस मार्जिन) वाले प्रीमियम प्रोजेक्ट्स पर ज़्यादा फोकस, पुराने डेवलपमेंट्स पर निर्भरता कम करेगा।
- इन-हाउस प्रीकास्ट प्लांट से प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की एफिशिएंसी बढ़ने और लागत कम होने की उम्मीद है।
- FY27 के लिए ₹5,000 करोड़ और FY30 तक ₹10,000 करोड़ का महत्वाकांक्षी प्री-सेल्स ग्रोथ टारगेट रखा गया है।
संभावित चुनौतियां
- इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी: कुल लागत 5% बढ़ी है, जबकि कुछ मटीरियल्स की कीमतें 8-13% तक बढ़ी हैं, जो मार्जिन पर असर डाल सकती हैं।
- सप्लाई चेन की दिक्कतें: इंटरनेशनल मटीरियल की कमी से प्रोजेक्ट में देरी हो सकती है।
- स्किल्ड लेबर की उपलब्धता एक चिंता का विषय बनी हुई है।
- पुराने प्रोजेक्ट्स से आने वाला रेवेन्यू, जो कम मार्जिन वाले हैं, FY27 तक 62% से घटकर 12% रह जाने की उम्मीद है, जो फिलहाल एक बोझ बना हुआ है।