SEBI (सेबी) का लक्ष्य शेयर बाजार को पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक (Demat) प्लेटफॉर्म पर लाना है। इसी कड़ी में, Jai Corp ने ऐसे शेयरधारकों के लिए एक विशेष व्यवस्था की है, जिनके पास 1 अप्रैल, 2019 से पहले के फिजिकल शेयर हैं। इन शेयरों को 4 फरवरी, 2027 की समय सीमा तक डिमैट रूप में बदलना होगा।
यह कदम उन निवेशकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो पुराने फिजिकल शेयर रखते हैं। इससे वे अपने शेयरों को आसानी से ट्रांसफर कर सकते हैं और भविष्य के सभी लेन-देन को सरल बना सकते हैं। खास तौर पर, जिन ट्रांसफर रिक्वेस्ट्स (Transfer Requests) में पुराने दस्तावेजों या प्रक्रियाओं की कमी के कारण दिक्कतें आई थीं, वे अब हल हो जाएंगी, जिससे शेयरधारकों के हितों की रक्षा होगी।
SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) पिछले कई सालों से शेयरों के डिमॉनेटाइजेशन (Dematerialisation) को बढ़ावा दे रहा है। इसका मकसद मार्केट में पारदर्शिता लाना, फिजिकल सर्टिफिकेट से जुड़े फ्रॉड (Fraud) को कम करना और ट्रेडिंग को आसान बनाना है। रियल एस्टेट जैसी कंपनियों में, जहां सौदे पुराने हो सकते हैं, ऐसे शेयरधारकों की संख्या अक्सर बड़ी होती है।
सीधे शब्दों में कहें तो, 1 अप्रैल, 2019 से पहले के फिजिकल शेयर रखने वाले शेयरधारकों को अब उन्हें डिमैट में बदलने के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा मिल गई है। Jai Corp भी SEBI के निर्देशों का पालन करके अपने रिकॉर्ड को व्यवस्थित कर रहा है। शेयरधारक अब उन ट्रांसफर को भी ठीक करवा सकते हैं जो पहले अस्वीकृत हो गए थे।
शेयरधारकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम 4 फरवरी, 2027 की समय सीमा चूक जाना है। अगर इस तारीख तक शेयर डिमैट नहीं हुए, तो उन्हें भविष्य में बेचना या ट्रांसफर करना मुश्किल हो सकता है।
रियल एस्टेट सेक्टर की अन्य पुरानी लिस्टेड कंपनियां, जैसे DLF Ltd (डीएलएफ लिमिटेड) और Oberoi Realty Ltd (ओबेरॉय रियल्टी लिमिटेड), भी अक्सर पुराने फिजिकल शेयरहोल्डिंग्स (Shareholdings) को संभालती हैं। वे भी SEBI के दिशानिर्देशों का पालन करती हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी शेयरधारक आधुनिक शेयर बाजार का लाभ उठा सकें।
निवेशकों को 4 फरवरी, 2027 की समय सीमा से पहले इस डिमैटेरियलाइज़ेशन (Dematerialisation) प्रक्रिया में भाग लेना चाहिए। यह देखना भी दिलचस्प होगा कि क्या SEBI या Jai Corp इस सुविधा की प्रगति पर कोई और घोषणा करते हैं, या क्या इस क्षेत्र की अन्य पुरानी कंपनियां भी इसी तरह की पहल शुरू करती हैं।