रियल एस्टेट में Hubtown की नई रणनीति
रियल एस्टेट सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करने और ग्रोथ को रफ्तार देने के इरादे से Hubtown Limited ने एक अहम कदम उठाया है। कंपनी ने एक नई, पूरी तरह से अपनी सहायक कंपनी 'Hubtowncentral Private Limited' का गठन किया है, जो विशेष रूप से रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगी। यह नई इकाई 29 मार्च, 2026 को स्थापित की गई है और इसकी शुरुआत ₹1,00,000 की ऑथोराइज्ड शेयर कैपिटल के साथ हुई है।
क्यों बनाई गई यह नई सब्सिडियरी?
कंपनी का कहना है कि इस नई सब्सिडियरी का गठन रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स पर विशेष ध्यान देने, ऑपरेशंस को सुव्यवस्थित करने और प्रोजेक्ट्स के एग्जीक्यूशन को बेहतर बनाने के लिए किया गया है। यह कदम कंपनी को अपने रियल एस्टेट डेवलपमेंट ऑपरेशंस को और अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में मदद करेगा।
कंपनी का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड
Hubtown Limited, जिसे पहले Ackruti City Limited के नाम से जाना जाता था, 1989 से भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में सक्रिय है। कंपनी ने आवासीय, वाणिज्यिक, आईटी, इंडस्ट्रियल और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। हाल के वर्षों में, कंपनी ने अपने डेवलपमेंट लैंड को कंसॉलिडेट करने और वैल्यू बढ़ाने के लिए विलय जैसे कदम उठाए हैं। कंपनी कर्ज-मुक्त स्थिति हासिल करने का लक्ष्य भी रख रही है, जिसके लिए FY2027 तक का समय तय किया गया है। Hubtown ने ₹600 करोड़ तक की कैपिटल रेज़ की योजना भी बनाई है, जिसके लिए शेयरहोल्डर्स से मंजूरी मांगी गई है। कंपनी के पास 30 मिलियन वर्ग फुट से अधिक का एक बड़ा प्रोजेक्ट पाइपलाइन है।
अतीत के रेगुलेटरी मामले
यह ध्यान देने योग्य है कि Hubtown Limited अतीत में कुछ रेगुलेटरी स्क्रूटनी का सामना कर चुकी है। मई 2022 में, कंपनी ने SEBI के साथ डिस्क्लोजर नॉर्म्स के उल्लंघन के एक मामले को ₹16.91 लाख का भुगतान करके निपटाया था। इससे पहले 2017 में भी एक अलग SEBI मामले का निपटारा किया गया था। कंपनी को मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नॉर्म्स को पूरा करने में देरी के लिए भी कार्यवाही का सामना करना पड़ा था, हालांकि बाद में प्रतिबंध हटा दिए गए थे।
कॉम्पिटिटिव लैंडस्केप
Hubtown एक प्रतिस्पर्धी रियल एस्टेट मार्केट में DLF Ltd., Oberoi Realty Ltd., Prestige Estates Projects Ltd., और Godrej Properties Ltd. जैसे बड़े डेवलपर्स के साथ प्रतिस्पर्धा करती है। ऐसे में, विशेष यूनिट्स के जरिए अपनी डेवलपमेंट कैपेसिटी को बढ़ाना कंपनी की एक खास रणनीति मानी जा रही है।
