SEBI के 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क को समझें
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के नियमों के अनुसार, 'लार्ज कॉर्पोरेट' (LC) फ्रेमवर्क 2018 में शुरू किया गया था, जिसका मकसद भारतीय डेट मार्केट में कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना है। किसी कंपनी को LC माने जाने के लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होती हैं, जैसे कि ₹100 करोड़ या उससे ज़्यादा का आउटस्टैंडिंग लॉन्ग-टर्म बोरिंग (कुछ छूट के साथ) और 'AA' या उससे ज़्यादा की क्रेडिट रेटिंग।
Grovy India के लिए, 31 मार्च, 2025 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में रेवेन्यू ₹26.4 करोड़ रहा। यह आंकड़ा दर्शाता है कि कंपनी का ऑपरेशनल स्केल अभी LC स्टेटस के लिए तय किए गए थ्रेशोल्ड से कम है। कंपनी ने पहले भी 31 मार्च, 2020 को अपनी नॉन-LC स्थिति कन्फर्म की थी और अब फिर से यही स्थिति बनी हुई है।
क्या है इस छूट का मतलब?
इन शर्तों को पूरा न करने की वजह से, Grovy India मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में डेट सिक्योरिटीज के ज़रिए फंड रेज़िंग से जुड़े कंप्लायंस बर्डन (Compliance Burden) और डिस्क्लोजर ऑब्लिगेशन्स (Disclosure Obligations) से बच जाएगी। कंपनी अपने मौजूदा डिस्क्लोजर फ्रेमवर्क के तहत ही काम करना जारी रखेगी और अपने रियल एस्टेट ऑपरेशन्स पर ध्यान केंद्रित करेगी।
अन्य कंपनी मामले और आउटलुक
Grovy India लिमिटेड कुछ अन्य कानूनी और वित्तीय मामलों से भी जूझ रही है। कंपनी ने इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल में INR 119.24 Lakhs की टैक्स डिमांड के संबंध में एक अपील दायर की है। इसके अलावा, नवंबर 2025 में, कंपनी ने दुर्व्यवहार के कारण अपने कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर को टर्मिनेट कर दिया था और एक अंतरिम ऑफिसर की नियुक्ति की थी।
इसी तरह, IST Limited जैसी अन्य लिस्टेड एंटिटीज ने भी SEBI लार्ज कॉर्पोरेट फ्रेमवर्क के लिए अपनी नॉन-एप्लीकेबिलिटी घोषित की है, जो बताता है कि कंपनियों का एक हिस्सा LC थ्रेशोल्ड से नीचे काम कर रहा है। निवेशक Grovy India के भविष्य के फाइनेंशियल डिस्क्लोजर्स, इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल के साथ उसकी अपील के नतीजे और एक परमानेंट कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर की नियुक्ति पर नज़र रखेंगे। भविष्य में LC क्राइटेरिया को पूरा करने की ओर ले जाने वाले किसी भी स्ट्रेटेजिक शिफ्ट या बिज़नेस एक्सपैंशन पर भी गौर किया जाएगा।
