FY26 के लिए Godrej Properties लिमिटेड (GPL) ने कंसोलिडेटेड (Consolidated) आधार पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए अपने नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का टोटल इनकम 20.72% की उछाल के साथ ₹8,410.88 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में ₹6,967.05 करोड़ था। वहीं, नेट प्रॉफिट में 32.50% का तगड़ा इजाफा हुआ और यह ₹1,840.66 करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले साल ₹1,389.23 करोड़ था।
चौथी तिमाही (Q4 FY26) में भी कंपनी का प्रदर्शन सराहनीय रहा, जहाँ कुल इनकम 41.98% बढ़कर ₹3,806.65 करोड़ और नेट प्रॉफिट 70.55% बढ़कर ₹645.44 करोड़ रहा। पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए अर्निंग्स पर शेयर (EPS) ₹61.43 दर्ज किया गया।
कंपनी अपने शेयरधारकों को ₹10 प्रति शेयर का डिविडेंड (Dividend) देने की सिफारिश की है।
बढ़ती चिंताएं और गवर्नेंस के मुद्दे:
इन शानदार नतीजों के बावजूद, कुछ ऐसी बातें हैं जिन पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। ऑडिटर की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि कंपनी का मैनेजेरियल रेमुनरेशन (Managerial Remuneration) वैधानिक सीमा से ₹21.57 करोड़ ज्यादा था। इसके अलावा, लेबर कोड से संबंधित ₹23.11 करोड़ का एक बार का खर्च भी रिपोर्ट किया गया है।
एक और बड़ी चिंता कंपनी के बढ़ते कर्ज को लेकर है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी के करेंट बरोइंग्स (Current Borrowings) में भारी बढ़ोतरी देखी गई, जो बढ़कर ₹13,364.87 करोड़ हो गए, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा ₹8,561.16 करोड़ था। शॉर्ट-टर्म डेट में यह भारी उछाल कंपनी के फाइनेंस कॉस्ट (Finance Cost) पर असर डाल सकता है।
स्टैंडअलोन प्रॉफिट में भारी गिरावट:
कंसोलिडेटेड नतीजों के विपरीत, Godrej Properties का स्टैंडअलोन (Standalone) एनुअल प्रॉफिट FY26 में काफी गिर गया। यह ₹1,011.01 करोड़ (FY25) से घटकर सिर्फ ₹348.75 करोड़ रह गया। इस बड़ी गिरावट के पीछे के कारणों को समझना निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
बाजार में अन्य प्रमुख कंपनियां (Peer Comparison):
Godrej Properties की मजबूत कंसोलिडेटेड ग्रोथ के मुकाबले, इसी क्षेत्र की अन्य बड़ी कंपनियों जैसे DLF Ltd, Prestige Estates Projects Ltd और Oberoi Realty Ltd ने भी FY26 के लिए अच्छे नतीजे पेश किए हैं। हालांकि, Godrej Properties के करेंट बरोइंग्स में आई यह उछाल अन्य कंपनियों की तुलना में ज्यादा है, जिस पर निवेशक बारीकी से नजर रखेंगे।
आगे क्या देखना होगा:
निवेशक अब इस बात पर ध्यान देंगे कि कंपनी मैनेजेरियल रेमुनरेशन को लेकर शेयरधारकों की मंजूरी कैसे प्राप्त करती है। साथ ही, बढ़ते कर्ज और उसके वित्तीय प्रभावों को लेकर मैनेजमेंट की रणनीति क्या होगी, यह भी अहम होगा। स्टैंडअलोन प्रॉफिट में आई गिरावट के कारणों और उसे सुधारने की कंपनी की योजनाओं पर भी गौर किया जाएगा।
