भारी घाटे की वजह और कंपनी के सामने चुनौतियां
कंपनी के बोर्ड ने 18 अप्रैल, 2026 को वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी। इन नतीजों के अनुसार, तीसरी तिमाही में कंपनी को ₹3,263.27 मिलियन यानी ₹326.33 करोड़ का शुद्ध घाटा (Loss After Tax) हुआ। वहीं, इस तिमाही में कंपनी का कुल रेवेन्यू ₹6,356.87 मिलियन यानी ₹635.69 करोड़ दर्ज किया गया।
फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही की बात करें तो, सितंबर 2025 तिमाही के अंत तक कुल घाटा ₹4,801.72 मिलियन (₹480.17 करोड़) तक पहुंच गया, जबकि छह महीने का रेवेन्यू ₹12,449.67 मिलियन (₹1,244.97 करोड़) रहा।
कंपनी के सामने कई बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। इनमें प्रमुख हैं Ebix Inc. का प्रस्तावित अधिग्रहण और फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड्स (FCCB) से जुड़े लंबे कानूनी विवाद। Ebix Inc. के अधिग्रहण के लिए अभी भी रेगुलेटरी अप्रूवल (Regulatory Approvals) और शेयरधारकों (Shareholders) की मंजूरी मिलनी बाकी है। यह डील कंपनी के लिए डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) का एक बड़ा जरिया हो सकती है, लेकिन फिलहाल यह कई अड़चनों का सामना कर रही है।
दूसरी ओर, FCCB विवादों के कारण कंपनी पर ₹104.97 करोड़ तक की कंटिंजेंट लायबिलिटी (Contingent Liabilities) का बोझ है, जिसमें अनरिकॉग्नाइज्ड इंटरेस्ट (Unrecognised Interest) भी शामिल है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के पुराने आदेशों और जारी अदालती मामलों के चलते देनदारियों को पहचानने में देरी हो रही है।
इस बीच, कंपनी ने अनुपालन (Compliance) और गवर्नेंस (Governance) के क्षेत्र में अनुभव रखने वाली सुश्री उर्वशी उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से नया कंपनी सेक्रेटरी नियुक्त किया है।
इन नियुक्तियों और स्पष्ट रेवेन्यू आंकड़ों के बावजूद, Ebix अधिग्रहण और FCCB बॉन्डधारकों के विवादों से जुड़े जोखिम अनसुलझे हैं, जो कंपनी के भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं। निवेशक अब रेगुलेटरी अप्रूवल, FCCB विवादों के समाधान और शेयरधारकों की मंजूरी पर बारीकी से नजर रखेंगे।
