पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) की बात करें तो, Elpro International का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 28.67% बढ़कर ₹593.15 करोड़ रहा, जो मुख्य तौर पर ट्रेडिंग एक्टिविटीज़ की वजह से संभव हुआ। वहीं, स्टैंडअलोन (Standalone) बेसिस पर कंपनी ने Q4 FY26 में ₹5.49 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया, जबकि पूरे साल का स्टैंडअलोन प्रॉफिट ₹33.27 करोड़ रहा, हालांकि इस दौरान स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 6.27% की गिरावट आई।
यह कंट्रास्ट (contrast) बताता है कि कंपनी अंदरूनी वित्तीय दबावों से जूझ रही है। Q4 का बड़ा घाटा, स्टैंडअलोन रेवेन्यू में कमी और बढ़ती फाइनेंस कॉस्ट (Finance Costs) कंपनी पर वित्तीय तंगी का संकेत दे रहे हैं।
Elpro International रियल एस्टेट डेवलपमेंट, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग और इन्वेस्टमेंट जैसी फील्ड्स में काम करती है। कंपनी के पास ₹2,365 करोड़ का बड़ा इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो भी है। हालांकि, कंपनी पर कर्ज़ का बोझ लगातार बढ़ रहा है। दिसंबर 2025 तक कंपनी पर कुल ₹974 करोड़ का कर्ज था, जिसमें लोन अगेंस्ट शेयर्स (Loan Against Shares) भी शामिल है। मार्च 2026 तक, कंसोलिडेटेड बरोइंग्स (borrowings) बढ़कर ₹1,189.38 करोड़ हो गई।
वित्तीय साल FY26 में, कंसोलिडेटेड फाइनेंस कॉस्ट 58% बढ़कर ₹106.25 करोड़ तक पहुंच गई, जिसने मुनाफे पर सीधा असर डाला।
ऑडिटर्स (Auditors) ने ₹339.45 करोड़ के AIF इन्वेस्टमेंट्स के वैल्यूएशन (valuation) को लेकर भी सवाल उठाए हैं, जो पिछले तिमाही के NAV पर आधारित था। ऐसे में इन्वेस्टर्स कंपनी की डेट मैनेजमेंट (debt management) स्ट्रेटेजीज़ और बढ़ती फाइनेंस कॉस्ट को संभालने की क्षमता पर बारीकी से नजर रखेंगे।
रियल एस्टेट सेक्टर में Elpro International के मुकाबले Godrej Properties, DLF और Brigade Enterprises जैसी कंपनियां बड़ी मार्केट कैप और ज्यादा डायवर्सिफाइड रेवेन्यू स्ट्रीम्स के साथ हैं। Elpro की ट्रेडिंग सेगमेंट में ग्रोथ तो अच्छी रही है, पर उसकी ओवरऑल फाइनेंशियल हेल्थ, लीवरेज (leverage) और तिमाही मुनाफा, इन बड़ी कंपनियों से अलग जोखिम-इनाम प्रोफाइल दिखाता है।
