कोर्ट का आदेश, चुकाना होगा ₹8.88 करोड़
कर्नाटक हाई कोर्ट ने Chalet Hotels Ltd के खिलाफ प्रॉपर्टी टैक्स विवाद में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने बेंगलुरु मैरियट होटल व्हाइटफील्ड के लिए प्रॉपर्टी टैक्स की नई दरों को चुनौती दी थी। इस फैसले के बाद, Chalet Hotels को लगभग ₹8.88 करोड़ का भुगतान करना होगा। कंपनी ने यह भी साफ किया है कि इस राशि का उसके बिजनेस ऑपरेशंस (business operations) या फाइनेंशियल परफॉर्मेंस (financial performance) पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।
टैक्स विवाद की पूरी कहानी
Chalet Hotels ने यह Writ Petition (याचिका) बेंगलुरु मैरियट होटल व्हाइटफील्ड के लिए प्रॉपर्टी टैक्स की तय की गई संशोधित दरों के खिलाफ दायर की थी। कोर्ट का यह फैसला 14 अप्रैल, 2026 का है, जो इन दरों को मान्य करता है, जिसमें वैधानिक बढ़ोतरी (statutory escalation) भी शामिल है।
यह कोर्ट का आदेश उस प्रॉपर्टी टैक्स विवाद को खत्म करता है, जिसमें पहले भी कानूनी चुनौतियां देखने को मिली थीं। आपको बता दें कि फरवरी 2026 में, कर्नाटक हाई कोर्ट ने ₹39.56 करोड़ के प्रॉपर्टी टैक्स नोटिस पर रोक लगा दी थी। इससे भी पहले, अगस्त 2023 में, Chalet Hotels ने लंबित कानूनी मामलों का खुलासा किया था, जिसमें उसी होटल के लिए 2008-2016 की अवधि के प्रॉपर्टी टैक्स के संबंध में BBMP (Bruhat Bengaluru Mahanagara Palike) से ₹25.6 करोड़ की डिमांड नोटिस भी शामिल थी। उस समय एक अंतरिम आदेश (interim stay) के तहत कंपनी को बढ़ी हुई राशि का 50% और मूल दर पर प्रॉपर्टी टैक्स चुकाने का निर्देश दिया गया था।
इस टैक्स देनदारी को निपटाने के लिए कंपनी को लगभग ₹8.88 करोड़ खर्च करने होंगे। यह Chalet Hotels के लिए एक प्रतिकूल (unfavorable) कानूनी फैसला है। भविष्य में बेंगलुरु स्थित इस एसेट (asset) के लिए प्रॉपर्टी टैक्स का आकलन कोर्ट द्वारा अनुमोदित दरों के अनुसार होने की उम्मीद है।
तत्काल जोखिम ₹8.88 करोड़ के कैश आउटफ्लो (cash outflow) का है, हालांकि Chalet Hotels का कहना है कि यह समग्र वित्तीय प्रदर्शन या संचालन को प्रभावित नहीं करेगा। पिछले टैक्स विवादों से यह भी संकेत मिलता है कि टैक्स अनुपालन (tax compliance) पर निरंतर जांच हो सकती है।
Chalet Hotels भारतीय हॉस्पिटैलिटी सेक्टर (hospitality sector) में प्रतिस्पर्धा का सामना करती है, जिसके प्रमुख प्रतिस्पर्धियों में Indian Hotels Company Ltd, EIH Ltd, और Lemon Tree Hotels Ltd शामिल हैं। इंडस्ट्री में प्रॉपर्टी टैक्स विवाद आम हैं, जहाँ स्थानीय प्राधिकरण (local authorities) अक्सर विभिन्न शुल्क लगाते रहते हैं। उदाहरण के लिए, दिल्ली हाई कोर्ट ने सितंबर 2025 में हाई-प्रोफाइल ग्राहकों (affluent clientele) का हवाला देते हुए लग्जरी होटलों के लिए प्रॉपर्टी टैक्स की ऊंची दर को बरकरार रखा था। इसी तरह की स्थिति 2016 में भी देखी गई थी जब बेंगलुरु के JW Marriott को BBMP द्वारा फर्नीचर जब्त किए जाने के बाद दबाव में ₹5.59 करोड़ प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान करना पड़ा था।