NCLT, मुंबई बेंच ने Axis Bank Limited द्वारा दायर की गई कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) याचिका को वापस लेने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला 19 मार्च, 2026 को सुनाया गया, जिससे Zee Learn की सब्सिडियरी Digital Ventures Private Limited (DVPL) के खिलाफ यह कार्यवाही समाप्त हो गई है।
यह याचिका इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 (IBC) की धारा 7 के तहत DVPL के खिलाफ CIRP शुरू करने के लिए दायर की गई थी।
Axis Bank की याचिका का खारिज होना Zee Learn के लिए एक बड़ी राहत है। इसने कंपनी पर लटके हुए कानूनी और वित्तीय दबाव को कम किया है। अब मैनेजमेंट पूरी तरह से अपने बिजनेस ऑपरेशन्स को बेहतर बनाने और ग्रोथ पर ध्यान केंद्रित कर सकेगा। यह सकारात्मक डेवलपमेंट निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा सकता है, जिससे कंपनी की वित्तीय स्थिरता और कानूनी स्थिति पर चिंताओं में कमी आएगी।
असल में, Axis Bank ने DVPL पर लगभग ₹106.35 करोड़ के डिफॉल्ट के चलते CIRP शुरू करने के लिए याचिका दायर की थी। NCLT मुंबई ने 19 नवंबर, 2024 को DVPL को CIRP में डाल भी दिया था। हालांकि, DVPL ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में अपील की थी, जिसने अंतरिम समाधान पेशेवर (IRP) को आगे कोई कदम न उठाने का निर्देश दिया था और Axis Bank के साथ कट-बैक व्यवस्था की अनुमति दी थी। इसके बाद, कई कानूनी प्रक्रियाओं और निर्देशों के बाद, DVPL के CIRP की वापसी की अर्जी दायर की गई, जिसे NCLT ने 19 मार्च, 2026 को सुनवाई के बाद मंजूरी दे दी।
यह पहली बार नहीं है जब Zee Learn ने इनसॉल्वेंसी की कार्यवाही का सामना किया हो। इससे पहले फरवरी 2023 में Yes Bank Ltd द्वारा ऐसी ही एक याचिका NCLAT द्वारा खारिज की गई थी। इसके अलावा, J.C. Flowers Asset Reconstruction Private Limited ने भी अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट में Zee Learn के खिलाफ एक CIRP मामले में अपनी अपील वापस ले ली थी।
इस फैसले से Axis Bank की CIRP याचिका से उत्पन्न प्राथमिक कानूनी खतरा अब पूरी तरह से समाप्त हो गया है। कंपनी का मैनेजमेंट अब अपने मुख्य बिजनेस ऑपरेशन्स और ग्रोथ की पहलों पर रिसोर्स और स्ट्रैटेजिक प्लानिंग को फिर से केंद्रित कर सकता है। इससे कंपनी की क्रेडिट योग्यत (Creditworthiness) और फाइनेंसिंग तक पहुंच में सुधार हो सकता है, साथ ही कम मुकदमेबाजी एक स्थिर माहौल प्रदान करेगी।
हालांकि, Zee Learn पर 219.8% का हाई डेट-टू-इक्विटी रेशियो अभी भी एक चिंता का विषय है, जो कंपनी के भारी वित्तीय लीवरेज को दर्शाता है। इसकी सब्सिडियरी, Liberium Global Resources, को भी कुछ प्रमुख क्लाइंट्स द्वारा सेवाएं जारी न रखने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे रेवेन्यू पर जोखिम है। यह याचिका भले ही खारिज हो गई हो, लेकिन कंपनी का समग्र वित्तीय स्वास्थ्य और कर्ज चुकाने की क्षमता जांच का विषय बनी रहेगी।
Zee Learn भारतीय शिक्षा क्षेत्र में काम करती है, जिसके FY25 तक $225 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके प्रतिस्पर्धियों में NIIT Limited, Veranda Learning Solutions, Aptech Ltd, और CL Educate Ltd (Career Launcher) जैसी कंपनियां शामिल हैं।
31 दिसंबर, 2025 (Q3 FY26) तक के आंकड़ों के अनुसार, Zee Learn ने ₹-2.65 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया। यह Q3 FY25 के ₹-3.76 करोड़ की तुलना में 29.52% की कमी (यानी घाटा कम हुआ) है। Q3 FY26 के लिए रेवेन्यू ₹83.52 करोड़ रहा, जो Q3 FY25 के ₹81.65 करोड़ की तुलना में 2.29% अधिक है। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो 219.8% बताया गया है।
आगे चलकर, निवेशकों को मैनेजमेंट से भविष्य की कर्ज कम करने की रणनीतियों और वित्तीय डी-लीवरेजिंग पर कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा, Liberium Global Resources के प्रदर्शन और क्लाइंट के नुकसान से निपटने के प्रयासों पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, तिमाही नतीजों में लगातार रेवेन्यू ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार के संकेतों पर नजर रखें।
